Articles discussing इन्द्रभूति
धर्मचक्र की धुरी-गणधर गौतम स्वामी
Sumatchand Diwakar · Jnana Desana, 2008
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1990
“मगवान् महावीर के प्रमुख गणधर इन्द्रभूति ने उनकी दिव्य वाग्गंगा का अवधघारण कर उसे दवादश अंगों में गुम्फित कर सुत्रबद्ध किया था”
आचार्य कुन्दकुन्द कृत 'अष्टपाहुड' में 'जीवन-मूल्य'
डॉ. प्रेमचन्द्र रांवका · Jain Vidya, 2013