Articles discussing सूरदास
पुष्पदंत और सुरदास (वात्सल्य)
डॉ. प्रेमसागर जैन · Jain Vidya, 1985
“यदि कोई यह् कहे कि सुरदास का बाल-वर्णन भी इन जेन काव्यों से प्रभावित था, तो स्वीकार नहीं किया जा सकता । सूरदास श्रपनी ही निजी परम्परा से प्रभावित थे, जैन काव्यों से नहीं”
संत कवियों एवं जैन हिन्दी कवियों का पद-साहित्य
Rashmi Jain · Jnana Desana, 2008
निर्धूम दीप की अप्रकप लौ
Jain Bharati, 2001