Articles discussing जैन शासन
समयसार की रचना में आचार्य कुन्दुकुन्द की दृष्टि
पं० बंशीघर व्याकरणाचाय · Jain Vidya, 1990
“जैन शासन के अनुसार कोई भी जीव श्रनादिसिद्ध नहीं है । जैसा कि શ્રુત दाशेनिकोंने माना है”
अनाहार सूत्र की साधिका
Jain Bharati, 2000
दो कालजयी नक्षत्र
साध्वी मुदितयशा · Jain Bharati, 2001