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आध्यात्मिक अर्थशास्त्र की प्रस्तावना
नन्दकिशोर आचार्य · Jain Bharati, 2001
आध्यात्मिक अर्थशास्त्र की प्रस्तावना
नन्दकिशोर आचार्य · Jain Bharati, 2001
“जैन भारती के जनवरी, 2001 अंक में 'आध्यात्मिक अर्थशास्त्र की प्रस्तावना” आलेख में श्री नन्दकिशोर आचार्य अर्थशास्त्रियों की उपरोक्त अवधारणा से पनप रहे उपभोक्ता समाज के खतरों की ओर इंगित करते हुए स्पष्ट करते हैं किआज की दुनिया का असली आर्थिक દ્ધ स्वदेशी व सार्वभौमिक प्रौद्योगिकी तथा विकेंद्रीकरण व केंद्रीकरण के बीच है।”