Articles discussing पतंजलि
लिङ्गपुराण का योगदर्शन
Satyavrat Verma · Sambodhi, 2018
“योगो निरोधो वृत्तेषु चित्तएय है (૨.૮.૭) - पतंजलि के प्रसिद्ध लक्षण 'योगश्वित्तवृत्तिनिरोध:' है (१.२) की प्रतिच्छाया मात्रा है”
निम्बार्क के द्वैताद्वैत सिद्धान्त में कर्म की अवधारणा
Ramanath Pandey · Sambodhi, 2010
प्राकृत भाषा : जितनी सहज उतनी सरल
Jaipal Vidyalankar · Sambodhi, 2010
काश्मीर शिवागमों में प्रमाण चिन्तन : पुस्तक की समीक्षा – समालोचना
Suryaprakash Vyas · Sambodhi, 2014