Articles discussing महाकवि पुष्पदन्त
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1985
“महाकवि पुष्पदन्त, (10वीं शती ई०) का स्थान भी म्रहाकवि स्वयंभू के समान ही प्रमुख है”
महाकवि पुष्पदन्त : व्यक्तित्व और कर्तृत्व
डां०° आदित्य प्रचण्डिया · Jain Vidya, 1985
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1986
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1987
“इससे पूवं चार विशेषांक पाठकों तक पहुंच चुके हैं--1. महाकवि સ્વયમ્ विशेषांक, 2. महाकवि पुष्पदस्त विशेषांक,. खण्ड एक 3. महाकवि पुष्पदन्त विशेषांक, खण्ड दो तथा 4. महाकवि धनपाल विशेषांक”