Articles discussing जेनविद्या
जैनविद्या का स्वयंभू विशेषांक : विद्वानों की दृष्टि में
Jain Vidya, 1985
जैनविद्या संस्थान, श्रीमहावीरजी
Jain Vidya, 1985
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1986
“भारतीय विद्याश्रों में जेनविद्या का श्रपना एक महत्त्वपूर्ण एवं विशिष्ट स्थान है। बिना इसके श्रष्ययन मनन के भारतीय दर्शन, इतिहास, धमं, संस्कृति, लोकजीवन आरादि का ज्ञान पूर्ण नहीं हो सकता।”
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1986
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1987
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1987