Articles discussing दिगम्बर जैन
श्री वीरसेनाचार्य (आधुनिक न्यायशास्त्र के संदर्भ में )
प्रोफेसर एल.सी. जैन, कु. प्रभा जैन · Jain Vidya, 1993
“શ્રી वीरसेनाचार्य ने दिगम्बर जैन आगम ग्रंथों, षट्खण्डागम एवं कषाव प्राभृत की પૂર્વ सामग्री को अभूतपूर्व रूप में प्रस्तुत कर अप्रतिम लोक-कल्याण किया।”
गणितसार-हेमराज कृत एक कृत एक अप्रकाशित गणितीय पाण्डुलिपि
Anupam Jain, Goldi Tiwari · Jnana Desana, 2008
“वस्तुतः उपरोक्त दोनों ग्रंथों में रचनाकार ने अपना परिचय दिया ह । इन ग्रंथों में उपलब्ध विवरण જે आधार पर हेमराज दिगम्बर जैन श्रावक થે | आपकी जाति खण्डलवाल एवं गोत्र भावसा था [P आपको सामान्यतः गोदीका नाम से पुकारा जाता”
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1986
सम्पादकीय
Jain Vidya, 1993
संस्कृत शतक-परम्परा का आद्यशतक : जिनस्तुतिशतक
डॉ. (कु.) आराधना जैन “स्वतंत्र' · Jain Vidya, 1996
“समन्तभद्राचार्य ने काव्य-सुजन के माध्यम से स्तुतिविद्या का उद्धार, संस्कार एवं विकास किया है अतः उन्हें दिगम्बर जैन संस्कृत परम्परा के आदि कवि, आद्य स्तुतिकार एवं आद्य शतककार होने का गौरव प्राप्त है।”
भविष्यदत्तकथा-विषयक साहित्य एक श्रनुशीलन
डॉ. कपूरचन्द जैन · Jain Vidya, 1986
जैनविद्या संस्थान, श्रीमहावीरजी
Jain Vidya, 1985
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1987