Articles discussing षट्खण्डागम
षट्खण्डागम और धवला में मार्गणास्थान की अवधारणा
डॉ. राजवीरसिंह शेखावत · Jain Vidya, 1993
सिद्धान्तचक्रवर्ती के 'गोम्मटसार' का कर्मकाण्ड : कर्मसिद्धान्त का प्रामाणिक सन्दर्भ
विद्यावाचस्पति डॉ. श्रीरंजनसूरिदेव, आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती · Jain Vidya, 1997
सम्पादकीय
Jain Vidya, 1993
“वीरसेन स्वामी ने कोई स्वतंत्र ग्रंथ नहीं लिखा । उन्होंने षट्खण्डागम के प्रथम પોચો खण्डो पर मुख्यतः प्राकृत भाषा મેં धवला टीका लिखी।”
आचार्य वीरसेन और उनका ज्ञानकेन्द्र
आचार्य राजकुमार जैन · Jain Vidya, 1993
आचार्य प्रभाचन्द्र के ग्रन्थों में 'तर्क प्रमाण' की अवधारणा
डॉ. राजकुमारी जैन · Jain Vidya, 2010
सम्पादकीय
Jain Vidya, 1997
समयसार का दार्शनिक पृष्ठ
डॉ. दरबारीलाल कोठिया · Jain Vidya, 1990
क्रियावाद बनाम कर्मवाद
Jain Bharati, 2001
श्री वीरसेनाचार्य (आधुनिक न्यायशास्त्र के संदर्भ में )
प्रोफेसर एल.सी. जैन, कु. प्रभा जैन · Jain Vidya, 1993
“શ્રી वीरसेनाचार्य ने दिगम्बर जैन आगम ग्रंथों, षट्खण्डागम एवं कषाव प्राभृत की પૂર્વ सामग्री को अभूतपूर्व रूप में प्रस्तुत कर अप्रतिम लोक-कल्याण किया।”