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धवला

8 articles in the archive discuss धवला, from Jain Vidya, Jain Bharati, Jnana Desana (1993–2010). Open any article for its summary, citation and original PDF.

8 articles

Articles discussing धवला

  1. आचार्य वीरसेन और उनकी कालजयी टीका 'धवला'

    डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव · Jain Vidya, 1993

    “इस दृष्टि से टीकाकार भी एक ग्रन्थकार के रूप में ही मानार्हं होते थे इसी प्रकार आचार्य वीरसेन (9वीं शती, ईसवी- सन् 816) द्वारा लिखी गई ' धवला ' टीका ने एक स्वतन्त्र ग्रन्थ की इयत्ता आयत्त कर ली है और वीरसेनाचार्य एक ग्रन्थकार आचार्य के रूप में शाश्वत्प्रतिष्ठ हो गये हैं”
  2. षट्खण्डागम और धवला में मार्गणास्थान की अवधारणा

    डॉ. राजवीरसिंह शेखावत · Jain Vidya, 1993

    “धवला में 'मार्गणास्थान ' का अर्थ स्पष्ट किया वा है कि सत् अर्थात् अस्तित्व आदि से युक्त चौदह ' जीवसमास अर्थात् गुणस्थान जिसमें भरथवा जिसके द्वारा खोजे जाते हैं उसे ' मार्गणास्थान' कहते”
  3. भट्टारक वीरसेन और उनका समय

    श्री रमाकान्त जैन · Jain Vidya, 1993

    “वीरसेन स्वामी की कषायपाहुड की इस प्राभृत व्याख्या जयधवला का समापन उनके शिष्य जिनसेन अपर नाम जयसेनः તે उसके कलेवर में 40,000 प्रमाणश्लोकों की अभिवृद्धिकर और उसे 60,000 श्लोकों के बृहद्काय ग्रन्थ મેં परिणत करते हुए श्रीमद् गुर्जरराय द्वारा अनुपालित (शासित) वारग्रामपुर में राजा अमोघवर्ष के राज्यकाल મેં शक संवत् 759 (सन् 837 ईस्वी) में फाल्गुन शुक्ल दशमी के पूर्वाह्न में नन्दीश्वर महोत्सव के अवसर पर किया था”
  4. जैनधर्म के मर्मज्ञ : श्री वीरसेनाचार्य

    श्री वीरसेनाचार्य, श्री कन्हैयालाल · Jain Vidya, 1993

  5. श्री वीरसेनाचार्य (आधुनिक न्यायशास्त्र के संदर्भ में )

    प्रोफेसर एल.सी. जैन, कु. प्रभा जैन · Jain Vidya, 1993

  6. अनेकांत का फलित नयवाद

    कुमार अनेकान्त जैन · Jain Bharati, 2001

  7. आचार्य प्रभाचन्द्र के ग्रन्थों में 'तर्क प्रमाण' की अवधारणा

    डॉ. राजकुमारी जैन · Jain Vidya, 2010

  8. धर्मचक्र की धुरी-गणधर गौतम स्वामी

    Sumatchand Diwakar · Jnana Desana, 2008