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जैनविद्या

16 articles in the archive discuss जैनविद्या, from Jain Vidya (1985–1999). Open any article for its summary, citation and original PDF.

16 articles

Articles discussing जैनविद्या

  1. षट्खण्डागम और धवला में मार्गणास्थान की अवधारणा

    डॉ. राजवीरसिंह शेखावत · Jain Vidya, 1993

  2. जैनधर्म के मर्मज्ञ : श्री वीरसेनाचार्य

    श्री वीरसेनाचार्य, श्री कन्हैयालाल · Jain Vidya, 1993

  3. अकलंकदेव कृत पुण्य और पाप का विवेचन

    डॉ. सूरजमुखी जैन · Jain Vidya, 1999

  4. प्रवचनसार में शुद्धोपयोग की महिमा एवं उस संबंधी गाथाओं का व्याकरणिक विश्लेषण

    डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1990

  5. सुदंसणचरिउ के मूल्यात्मक प्रसंग - एक व्याकरणिक विश्लेषण

    डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1987

  6. हेमचन्द्र-अपभ्रन्श-व्याकरण सूत्र-विवेचन

    डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1987

  7. समयसार की रचना में आचार्य कुन्दुकुन्द की दृष्टि

    पं० बंशीघर व्याकरणाचाय · Jain Vidya, 1990

  8. जंबसामिचरिउ के यशस्वी महाकवि वीर का व्यक्तित्व

    डॉ. महेन्द्रसागर प्रचंडिया · Jain Vidya, 1987

  9. प्रास्ताविक

    Jain Vidya, 1988

  10. सम्पादकीय

    Jain Vidya, 1999

  11. भविसयत्तकहा में युग और समाज के संदर्भ

    डं° रामगोपाल शर्मा “दिनेश · Jain Vidya, 1986

  12. आरम्भिक

    Jain Vidya, 1985

  13. प्रकाशकीय

    Jain Vidya, 1988

  14. प्रकाशकीय

    Jain Vidya, 1991

    “अरब तक जैनविद्या के विशेषांकों द्वारा स्वयंभु, पुष्पदन्त, घनपाल, वीर, मुनिनयनन्दि, कनकामर, योगीन्दु भ्रौर प्नाचायं कुन्दकुन्द के जीवन, दर्शन और साहित्य पर प्रकाश डाला जाः चुका है”
  15. प्रकाशकीय

    Jain Vidya, 1990

  16. भविसयत्तकहा का कथारूप

    Jain Vidya, 1986