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हेमचन्द्र

18 articles in the archive discuss हेमचन्द्र, from Sambodhi, Jain Vidya (1985–2017). Open any article for its summary, citation and original PDF.

18 articles

Articles discussing हेमचन्द्र

  1. जैन संस्कृत व्याकरण परम्परा

    Balram Shukla · Sambodhi, 2017

  2. प्रमाण-लक्षण-निरुपण में प्रमाणमीमांसा का अवदान

    Sagarmal Jain · Sambodhi, 1989

    ““हेमचन्द्र कहते & कि प्रजा में यदि व्यापक देशायेस और झूरवीरता हो, किन्तु यदि घार्मिक उदारता A हो તો देवा की जनता खतरे में ही -होगी यह निश्चित ही समझना चाहिए”
  3. Hemacandra’s Pramana-Mimamsa - Some Striking Features

    Sagarmal Jain · Sambodhi, 1989

  4. संस्कृत भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में जैन श्रमण परम्परा का अवदान

    Sagarmal Jain · Sambodhi, 2012

  5. Jain Darshans ka Anya Darshanon se Dvirdh Avdaan (Hindi)

    Sagarmal Jain · Sambodhi, 2011

    “यद्यपि हरिभद्र के परवर्ती जैन दार्शनिकों में हेमचन्द्र, यशोविजय, आनन्दघन आदि अन्य धर्मों और दर्शनों के प्रति समभाव ओर उदारता का परिचय देते हैं, किन्तु उनकी यह उदारता उन पर हरिभद्र के प्रभाव को ही सूचित करती है ।”
  6. कविमनीषी जोइन्दु का भ्राध्यात्मिक शिखरकाव्य परमात्मप्रकाश

    डॉ. श्रोरंजन सुरिदेव, डॉ. हरिवंश कोछड़, डॉ. श्रादिनाथ नेमिनाथ उपाध्ये · Jain Vidya, 1988

  7. हेमचन्द्र-अपभ्रन्श-व्याकरण सूत्र-विवेचन

    डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1988

  8. योगीन्दुदेव और हिन्दी संत-परम्परा

    डॉ. भागचन्द जैन · Jain Vidya, 1988

  9. भविसयत्तकहा का कथारूप

    Jain Vidya, 1986

  10. हेमचन्द्र-प्राकृत-व्याकरण

    डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1988

  11. हेमचन्द्र-अपभ्रन्श-व्याकरण सूत्र-विवेचन

    डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1987

  12. प्रास्ताविक

    मुनि श्री नयनन्दी · Jain Vidya, 1987

  13. प्रास्ताविक

    Jain Vidya, 1986

  14. आचार्य प्रभाचन्द्र द्वारा प्रतिपादित प्रमाण : स्वरूप एवं विश्लेषण

    डॉ. एच. सी. जैन · Jain Vidya, 2010

  15. प्रारम्भिक

    प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1986

    “धनपाल के समय के सम्बन्ध में विद्वानों में मतभेद है । डॉ. पी. डी. ગુણે घनपाल કી प्रव तक प्राप्त एक मात्र रचना “भविसयत्त-कहा” की भाषा एवं व्याकरण की दृष्टि से उसमे शिथिलता श्रौर श्रनेकरूपता परिलक्षित कर उसे भ्राचायं हेमचन्द्र से पूर्व की, उस काल की स्वीकार करते हैं”
  16. काव्यप्रकाश-सद्गीतकार आचार्य माणिक्यचन्द्रसूरि के स्वरचित उदाहरण

    Vijay Pal Shastri · Sambodhi, 2009

    “माणिक्यचन्द्र की “संड्लेत' टीका के आरम्भिक कथन से प्रतीत होता है कि इन्होंने इन पूर्ववर्ती टीकाओं तथा आचार्य हेमचन्द्रादि के ग्रन्थों से बहुत कुछ ग्रहण करके यह टीका बनाई थी”
  17. महापुराण की काव्यभाषा

    डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव · Jain Vidya, 1985

  18. भूमिका

    डॉ. देवेन्द्रकुमार शास्त्री · Jain Vidya, 1985