Articles discussing यशोविजय
संस्कृत भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में जैन श्रमण परम्परा का अवदान
Sagarmal Jain · Sambodhi, 2012
Jain Darshans ka Anya Darshanon se Dvirdh Avdaan (Hindi)
Sagarmal Jain · Sambodhi, 2011
“यद्यपि हरिभद्र के परवर्ती जैन दार्शनिकों में हेमचन्द्र, यशोविजय, आनन्दघन आदि अन्य धर्मों और दर्शनों के प्रति समभाव ओर उदारता का परिचय देते हैं, किन्तु उनकी यह उदारता उन पर हरिभद्र के प्रभाव को ही सूचित करती है ।”