Articles discussing भविसयत्तकहा
भविसयत्तकहा का साहित्यिक महत्त्व
Jain Vidya, 1986
कहाकवि धनपाल का काव्य प्रतिमा
डॉ० योगेच््रनाथ शर्मा · Jain Vidya, 1986
“'भविसयत्तकहा'” के कथाकार धनपाल ने भी श्रपनी इस कृति में श्रपने विषय में लिखा है- घक्कडवरिवंसि माएसरहो समुभ्भविरण”
भविसयत्तकहा का धार्मिक परिवेश
श्री भीयांशकुमार सिघई · Jain Vidya, 1986
अपभ्रंश का शिखर महाकाव्य भविसयत्तकहा
डॉ० शरीरंजन सूरिदेव, धनपाल · Jain Vidya, 1986
भविसयत्तकहा का कथारूप
Jain Vidya, 1986
भेंट कवि धनपाल से
नेमीचंद पटोरिया · Jain Vidya, 1986
भविसयत्तकहा में युग और समाज के संदर्भ
डं° रामगोपाल शर्मा “दिनेश · Jain Vidya, 1986
भविसयत्तकहा में नीतितत्त्व
डां° गंगाराम गगं · Jain Vidya, 1986
“श्रपश्रंश कथा साहित्य में धनपाल कृत 'भविसयत्तकहा' का बड़ा महत्व है | भ्रपश्रंश साहित्य के अरन्वेषकों ने नगर, समुद्र प्रादि विभिन्न વાત, वात्सल्य, पगार एवं कर्ण रस के समन्वय तथा कथा-संगठन की दृष्टि से 'भविसयत्तकहा' को श्रेष्ठ कृति प्रमाणित किया है”
भविष्यदत्तकथा-विषयक साहित्य एक श्रनुशीलन
डॉ. कपूरचन्द जैन · Jain Vidya, 1986
प्रारम्भिक
प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1986
भविसयत्तकहा में जीवन का प्रतिबिम्ब
डॉ. गजानन नरसिंह साठे · Jain Vidya, 1986
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1986