Articles discussing पुष्पदन्त
पुष्पदंत काव्य में प्रयुक्त “लक्ष्मी”
Jain Vidya, 1985
“महांकंवि पुष्पदन्त का श्रलौकिक श्रेणी के कविसमयों में शुक्ल पक्षास्तगंत “लक्ष्मी” पर શ્રાજત कविसमय उल्लेखनीय है।”
जैन रामकथाओं के परिप्रेक्ष्य पुष्पदन्त की रामकथा
सुशो प्रीति जैन · Jain Vidya, 1985
“। जैनरामकथा दो धारात्रों में उपलब्ध है ।* एक धारा मे विमलसूरि, रविषेण व स्वयंभू द्वारा मान्य શ્રોર दूसरी धारा में गुणाभद्र व पुष्पदन्त द्वारा मान्य कथाएं हैं”
कहाकवि धनपाल का काव्य प्रतिमा
डॉ० योगेच््रनाथ शर्मा · Jain Vidya, 1986
करकण्डचरिउ में प्रतिपादित इतिहास व संस्कृति
भागचन्द्र भास्कर · Jain Vidya, 1988
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1986
“संस्कृत के विद्वानों ने तो श्रपश्रंशको देशभाषा कहा ही, स्वयं प्रप्रंश कवियों यथा--स्वयंभू, पुष्पदन्त ने भी इसे देशभाषा बताया है ।”
महाकवि वीर की दार्शनिक दृष्टि
Jain Vidya, 1987
प्रारम्भिक
Jain Vidya, 1985
सम्पादकीय
प्रारस्मिक
प्रवीरचन््र जैन · Jain Vidya, 1988
भट्टारक वीरसेन और उनका समय
श्री रमाकान्त जैन · Jain Vidya, 1993
जैन साहित्य में रामकथा
Alok Kumar Mishra · Jnana Desana, 2011
प्रारम्भिक
प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1987
कविमनीषी योगीन्दु का काव्यशास्त्रीय मूल्यांकन
Jain Vidya, 1988
परमात्मप्रकाश एक विश्लेषण
डॉ. गदाधर सिंह · Jain Vidya, 1988