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पुष्पदन्त

14 articles in the archive discuss पुष्पदन्त, from Jain Vidya, Jnana Desana (1985–2011). Open any article for its summary, citation and original PDF.

14 articles

Articles discussing पुष्पदन्त

  1. पुष्पदंत काव्य में प्रयुक्त “लक्ष्मी”

    Jain Vidya, 1985

    “महांकंवि पुष्पदन्त का श्रलौकिक श्रेणी के कविसमयों में शुक्ल पक्षास्तगंत “लक्ष्मी” पर શ્રાજત कविसमय उल्लेखनीय है।”
  2. जैन रामकथाओं के परिप्रेक्ष्य पुष्पदन्त की रामकथा

    सुशो प्रीति जैन · Jain Vidya, 1985

    “। जैनरामकथा दो धारात्रों में उपलब्ध है ।* एक धारा मे विमलसूरि, रविषेण व स्वयंभू द्वारा मान्य શ્રોર दूसरी धारा में गुणाभद्र व पुष्पदन्त द्वारा मान्य कथाएं हैं”
  3. कहाकवि धनपाल का काव्य प्रतिमा

    डॉ० योगेच््रनाथ शर्मा · Jain Vidya, 1986

  4. करकण्डचरिउ में प्रतिपादित इतिहास व संस्कृति

    भागचन्द्र भास्कर · Jain Vidya, 1988

  5. प्रास्ताविक

    Jain Vidya, 1986

    “संस्कृत के विद्वानों ने तो श्रपश्रंशको देशभाषा कहा ही, स्वयं प्रप्रंश कवियों यथा--स्वयंभू, पुष्पदन्त ने भी इसे देशभाषा बताया है ।”
  6. महाकवि वीर की दार्शनिक दृष्टि

    Jain Vidya, 1987

  7. प्रारम्भिक

    Jain Vidya, 1985

  8. सम्पादकीय

    डॉ. गोपीचन्द पाटनी, ज्ञानचन्द्र खिन्दूका · Jain Vidya, 1993

  9. प्रारस्मिक

    प्रवीरचन््र जैन · Jain Vidya, 1988

  10. भट्टारक वीरसेन और उनका समय

    श्री रमाकान्त जैन · Jain Vidya, 1993

  11. जैन साहित्य में रामकथा

    Alok Kumar Mishra · Jnana Desana, 2011

  12. प्रारम्भिक

    प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1987

  13. कविमनीषी योगीन्दु का काव्यशास्त्रीय मूल्यांकन

    Jain Vidya, 1988

  14. परमात्मप्रकाश एक विश्लेषण

    डॉ. गदाधर सिंह · Jain Vidya, 1988