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स्वयंभू

16 articles in the archive discuss स्वयंभू, from Jain Vidya, Jnana Desana (1985–2011). Open any article for its summary, citation and original PDF.

16 articles

Articles discussing स्वयंभू

  1. आरम्भिक

    Jain Vidya, 1985

    “महाकवि स्वयंभू के पश्चात् जिस महाकवि का नाम શ્રવખ્ર શ साहित्य के ज्ञात रचनाकारों की सूची મે ત્રાતા है वे हैं महाकवि पुष्पदंत।”
  2. प्रास्ताविक

    Jain Vidya, 1986

    “संस्कृत के विद्वानों ने तो श्रपश्रंशको देशभाषा कहा ही, स्वयं प्रप्रंश कवियों यथा--स्वयंभू, पुष्पदन्त ने भी इसे देशभाषा बताया है ।”
  3. रायकुमारचरिउ एक आद्यन्त जैन-काव्य

    डॉ. गजानन नरसिंह साठे · Jain Vidya, 1985

  4. जम्बूसामिचरिउ की कथानकसूष्टि और हिन्दी काव्य-परम्परा

    डां. (श्रीमती) पुष्पलता जैन · Jain Vidya, 1987

  5. इस अंक के सहयोगी रचनाकार

    डॉ० उदयचंद जैन · Jain Vidya, 1990

  6. जैन रामकथाओं के परिप्रेक्ष्य पुष्पदन्त की रामकथा

    सुशो प्रीति जैन · Jain Vidya, 1985

    “। जैनरामकथा दो धारात्रों में उपलब्ध है ।* एक धारा मे विमलसूरि, रविषेण व स्वयंभू द्वारा मान्य શ્રોર दूसरी धारा में गुणाभद्र व पुष्पदन्त द्वारा मान्य कथाएं हैं”
  7. रायकुमारचरिउ की सूक्तियाँ और उनका अध्ययन

    डां० कंस्तुरचद “सुमन · Jain Vidya, 1985

  8. प्रारम्भिक

    प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1987

  9. कविमनीषी योगीन्दु का काव्यशास्त्रीय मूल्यांकन

    Jain Vidya, 1988

  10. प्रास्ताविक

    Jain Vidya, 1987

  11. हरिवंशपुराण

    Jain Vidya, 1993

  12. प्रकाशकीय

    कपूरचन्द पाटनी · Jain Vidya, 1985

    “इससे पूवं पत्रिका का प्रथम પ્રક श्रपश्नश के ही ज्ञात महाकवियों में भ्रादतम महाकवि स्वयंभू के नाम पर प्रकाशित हुभ्रा था”
  13. जैन साहित्य में रामकथा

    Alok Kumar Mishra · Jnana Desana, 2011

  14. प्रारम्भिक

    Jain Vidya, 1985

  15. प्रास्ताविक

    डॉ. गोपीचन्द पाटनी · Jain Vidya, 1988

  16. महाकवि पुष्पदंत के आदिपुराण की एक सचित्र पाण्डुलिपि

    राँ कस्तू रचन्द कासलीवाल · Jain Vidya, 1985