Articles discussing जसहरचरिउ
जसहरचरिउ में श्रात्मा सम्बन्धी विचार
धीर्यांशकुमार सिघई · Jain Vidya, 1985
“जसहरचरिउ मे चतुविशति तीर्थकरों की qugas स्तुति का समावेश होने से मुक्त श्रात्माश्रों का मूल्यांकन परिगणनं परिलक्षित होता है”
यशोधर का श्राख्यान गुरुकुल में व्याख्यान
नेमीचंद पटोरिया · Jain Vidya, 1985
महाकवि पुष्पदंत की विचारदृष्टि एवं उपमानसृष्टि
डं० श्रीमती पुष्पलता जैन · Jain Vidya, 1985
जसहरचरिउ केर सुहासिय-वयरााइं
पं. भंवरलाल पोल्याका · Jain Vidya, 1985
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1985
महाकवि पुष्पदंत का दार्शनिक ऊहापोह
डा० भागचद जन “भास्कर · Jain Vidya, 1985
आरम्भिक
Jain Vidya, 1985
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1985
अपभ्रंश के संवेदनशील महाकवि पुष्पदंत
डां० देवेन्रकुमार શાસ્ત્રी · Jain Vidya, 1985
रायकुमारचरिउ की सूक्तियाँ और उनका अध्ययन
डां० कंस्तुरचद “सुमन · Jain Vidya, 1985