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महापुराण

19 articles in the archive discuss महापुराण, from Jain Vidya, Jnana Desana (1985–2010). Open any article for its summary, citation and original PDF.

19 articles

Articles discussing महापुराण

  1. जैन रामकथाओं के परिप्रेक्ष्य पुष्पदन्त की रामकथा

    सुशो प्रीति जैन · Jain Vidya, 1985

  2. महापुराण की काव्यभाषा

    डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव · Jain Vidya, 1985

    “महापुराण” AT श के महाकवि पुष्पदंत (ईसा की 10वीं शती] द्वारा सौष्ठवपूणं काव्यभाषा मे रचित महाकाव्य है।”
  3. अपभ्रंश के संवेदनशील महाकवि पुष्पदंत

    डां० देवेन्रकुमार શાસ્ત્રी · Jain Vidya, 1985

  4. महाकवि पुष्पदंत और उनकी रसाभिव्यक्ति

    डॉं० प्रेमचंद रांवका · Jain Vidya, 1985

  5. महाकवि पुष्पदंत द्वारा रचित महापुराण की बिम्ब-योजना

    डॉ० गदाघरसिह · Jain Vidya, 1985

    “महापुराण का दर्शन जेन-दशेन है श्रौर इसलिए कवि वैराग्य को जीवन का चरम लक्ष्य मानकर भी जडता, गतिहीवता एवं किकतव्यविमूढता को प्रश्रय नहीं देता”
  6. पुष्पदंत काव्य में प्रयुक्त “लक्ष्मी”

    Jain Vidya, 1985

  7. महाकवि पुष्पदंत का दार्शनिक ऊहापोह

    डा० भागचद जन “भास्कर · Jain Vidya, 1985

  8. जैन पुराणों में प्रतिबिम्बित सामाजिक एवं नैतिक जीवन मुल्य

    Rajendra Kumar Bansal · Jnana Desana, 2010

  9. प्रास्ताविक

    Jain Vidya, 1985

  10. महाकवि पुष्पदंत के आदिपुराण की एक सचित्र पाण्डुलिपि

    राँ कस्तू रचन्द कासलीवाल · Jain Vidya, 1985

  11. पुष्पदंत की भाषा

    डॉ. कैलाशचन्द्र भाटिया · Jain Vidya, 1985

    “पुष्पदंत ने झपने महापुराणं में संस्कृत શ્રૌર प्राकृत के साथ-साथ ् रपश्नश का भी स्पष्ट उल्लेख किया है”
  12. पुष्पदंत और सुरदास (वात्सल्य)

    डॉ. प्रेमसागर जैन · Jain Vidya, 1985

  13. महापुराण के रामायण खण्ड की बिम्ब-योजना

    Jain Vidya, 1985

  14. महाकवि पुष्पदंत का काव्यप्रतिभा

    Jain Vidya, 1985

  15. रायकुमारचरिउ की सूक्तियाँ और उनका अध्ययन

    डां० कंस्तुरचद “सुमन · Jain Vidya, 1985

  16. मुनि कनकामर : व्यक्तित्व और कृतित्व

    मुनि कनकामर, (श्रीमती) अलका प्रचण्डिया 'दीति' · Jain Vidya, 1988

  17. अपभ्रंश का शिखर महाकाव्य भविसयत्तकहा

    डॉ० शरीरंजन सूरिदेव, धनपाल · Jain Vidya, 1986

  18. महाकवि पुष्पदंत की विचारदृष्टि एवं उपमानसृष्टि

    डं० श्रीमती पुष्पलता जैन · Jain Vidya, 1985

  19. संस्थान में महाकवि पुष्पदंत के ग्रन्थों की पाण्डुलिपियां

    Jain Vidya, 1985

    “संयोग से जेनविद्या संस्थान के पाण्डुलिपि सर्वेक्षण विभाग में प्राचीनतम पाण्डुलिपि पष्पदन्त के महापुराण की वि०सं० 1391 की लिपीकृत है”