Articles discussing रामायण
रामायण का सत्य और महाभारत का धर्म (Truth of the Ramayana and the Dharma of the Mahabharata)
Ambikadatta Sharma · Sambodhi, 2019
“रामायण का महामंत्र और मूलमित्ति 'धर्मः सत्यपरोलोके' है तो महाभारत का मूलमंत्र 'यतो धर्मस्ततो जयः' है।”
सुदंसणचरिउ का साहित्यिक मूल्यांकन
नयनंदि · Jain Vidya, 1987
“मुनिश्नी नयनंदि का कहना है कि रामायण में राम श्रौर सीता का वियोग है, महाभारत में यादव, पाण्डव श्रौर घृतराष्ट्र के वंशों का मंयकर क्षय हुमा है परन्तु सुदर्शन के चरित में कलंक की एक रेखा भी नहीं है”
अपभ्रंश का शिखर महाकाव्य भविसयत्तकहा
डॉ० शरीरंजन सूरिदेव, धनपाल · Jain Vidya, 1986
बाल मन की गहराइयां
सरोज छाजेड़ · Jain Bharati, 2001
महापुराण की काव्यभाषा
डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव · Jain Vidya, 1985
“महाकवि पुष्पदंत જે कुल एक सौ दो सन्धियों से समन्वित इस महापुराण में तिरसठ महापुरुषों के वणंन-क्रम में, जैनाम्नायकी दृष्टि से “रामायण” श्रौर “महाभारत” की कथाश्रोंको भी प्रस्तर्भृत किया गया है”
कांगड़ा शैली में नायिका‑भेद अंकन
Ritika Garg · Sambodhi, 2018
मर्यादा : अनुशासन का आधार
Jain Bharati, 2001