कांगड़ा शैली में नायिका‑भेद अंकन
By Ritika Garg
Summary
रीतिका गर्ग इस लेख में कांगड़ा चित्रशैली में नायिका‑भेद अर्थात् नारी के विभिन्न प्रकारों के अंकन का अध्ययन प्रस्तुत करती हैं। लेख भारतीय कला में प्रकृति और नारी के सौन्दर्य की महिमा से आरम्भ होता है और बताता है कि नारी के गुणों और भावों की तुलना प्रकृति के विभिन्न अवयवों से की जाती रही है। कांगड़ा शैली, जो 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पुष्पित हुई, में मुगल, राजस्थानी और पहाड़ी कलाओं का प्रभाव है किन्तु इसकी अपनी कोमल रंग योजना और भावनात्मक अभिव्यक्ति इसे विशिष्ट बनाती है। लेखक नायिका‑भेद का परिचय देते हैं—स्वाधीन पट्टा नायिका, अभिसारिका, प्रोषितभर्तृका आदि—और बताते हैं कि कांगड़ा चित्रों में इन नायिकाओं की भावनाओं, मुद्राओं और वेशभूषा का सूक्ष्म चित्रण किया गया है। लेख में चुनिन्दा चित्रों का वर्णन है जिनमें नायिका के श्रंगार, विरह, उत्सुकता और अभिमान के भावों को दर्शाया गया है। गर्ग ने चित्रकारों की रेखांकन क्षमता, रंग संयोजन और पृष्ठभूमि चित्रण की सराहना की है। उनका मानना है कि कांगड़ा शैली में नायिका‑भेद का अंकन न केवल सौंदर्यपरक है बल्कि स्त्री‑मन की जटिलताओं को भी समझने का माध्यम है।
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Conclusion
कांगड़ा शैली में नायिका‑भेद का चित्रण भारतीय चित्रकला की भावपूर्ण परम्परा का उत्कृष्ट उदाहरण है। नारी भावों की सूक्ष्म प्रस्तुति, कोमल रंगों और प्राकृतिक पृष्ठभूमि ने इस शैली को अनन्य स्थान दिया है।