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लोक कला के नये मुहावरे गढ़ते : यामिनी राय के चित्र

By Rajendra Prasad

Vol. 41Dec-18pp. 163–168Hindi

Summary

राजेन्द्र प्रसाद का यह लेख बंगाल के प्रसिद्ध कलाकार यामिनी राय की कला पर केन्द्रित है। लेखक बताते हैं कि यामिनी राय ने तीसरे दशक में भारतीय लोक कला के स्रोतों से प्रेरणा लेकर नए चित्रण मुहावरे विकसित किये। वे लोक कला को मानव मानस का सहज रंजन भाव बताते हैं जो रूपकारों के माध्यम से अभिव्यक्त होता है। लेख में लोक कला की सरलता, प्रतीकात्मकता और प्रतिरूपात्मकता का वर्णन है और कहा गया है कि यह मन की सहजावस्था से आनन्द की निर्मल धारा है। यामिनी राय ने बंगाल की पट चित्र परम्परा, कालीघाट शैली और ग्रामीण शिल्पकारों से प्रेरणा लेकर अपने चित्रों में लोक जीवन, मिथकीय कथाएँ और ग्राम्य वातावरण को साधारण रेखाओं और गाढ़े रंगों में उकेरा। उनके चित्रों में भारतीयता और सहज सौन्दर्य का अनूठा संगम है। प्रसाद उनके जीवन की पृष्ठभूमि—बांकुड़ा जिले का जन्म, संथाल और अन्य जनजातियों का परिवेश—का उल्लेख करते हैं और बताते हैं कि यह लोक संस्कृतिक माहौल उनकी कला में प्रतिबिम्बित हुआ है। यामिनी राय ने आधुनिक कला को लोक जड़ों से जोड़ने का कार्य किया, जिससे भारतीय चित्रकला में स्वदेशी चेतना का संचार हुआ। लेखक का निष्कर्ष है कि यामिनी राय के चित्र न केवल सौन्दर्य का आनंद देते हैं बल्कि लोक परम्परा को जीवित रखने का संदेश भी देते हैं।

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Conclusion

यामिनी राय की कला सिद्ध करती है कि लोक परम्परा आधुनिक अभिव्यक्ति के लिए अनंत संभावनाएँ प्रदान करती है। उनके चित्रों के माध्यम से भारतीयता का सहज सौन्दर्य और सांस्कृतिक आत्मगौरव नये मुहावरों में रूपायित हुआ है।

Key passages

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  • “लोक कला मानव के मानस का वह लोक रंजन भाव है जो रूपकारों में परिवर्तित हो रेखाओं के माध्यम से व्यक्त होता है।”
  • “बंगाल बिहार सीमा के पास बसे इस गाँव में संथाल, मल्ल और बारूई सरीखी कई जनजातियों के लोग रहते थे।”
  • “यामिनी राय को विषय-वस्तु चुनने में कोई कठिनाई नहीं થી । उनके विषय इर्द-गिर्द જે लोगों से लिये गये हैं, खास तौर पर ब्राउल, बाओरी, सन्थाल और मल्ल जैसे ग्रामीण जन बहुलता से उनके चित्रों में प्रकट होते हैं”

Works cited in this article

  1. भारत की लोक कला और हस्तशिल्प, नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली, 1994, पृ. 1.
  2. समकालीन भारतीय कला, निर्मल बुक एजेंसी, कुरुक्षेत्र, 2003, पृ. 42.
  3. भारतीय चित्रकला, मित्र प्रकाशन प्रा. लि. इलाहाबाद, 1963, पृ. 261.
  4. यामिनी राय का पुनर्मूल्यांकन, समकालीन कला, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली, सं. 7-8, नवम्बर 1986/मई 1987, पृ. 5.
  5. भारतीय चित्रकला का इतिहास, प्रकाश बुक डिपो, बरेली, 2012, पृ. 278.

Discussed in this article

People

  • यामिनी राय
  • राम 13
  • राजेन्द्र प्रसाद
  • सुचीन्द्रनाथ दत्ता
  • विष्णु दे
  • शिव
  • कृष्ण 9

Places

  • बांकुड़ा
  • बेलियातोड

Texts & works

Dynasties, sects & groups

  • मल्ल
  • दत्त
  • संथाल

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Vol. 41
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