Articles discussing कृष्ण
जैन पुराणों में प्रतिबिम्बित सामाजिक एवं नैतिक जीवन मुल्य
Rajendra Kumar Bansal · Jnana Desana, 2010
धर्म और विज्ञान : कैसे पटेगी बीच की खाई
दयालचन्द्र सोनी · Jain Bharati, 2000
संस्कृति, शिक्षा ओर राजनीति
यशदेव शल्य · Jain Bharati, 2000
निर्धूम दीप की अप्रकप लौ
Jain Bharati, 2001
मानव-धर्म
डॉ. भगवान दास · Jain Bharati, 2000
मविसयत्तकहा का भावबोध
डॉ. छोटेलाल शर्मा · Jain Vidya, 1986
“'भानुदत्त' ने तो मिथ्या ज्ञानवासना' को स्थायी मानकर 'मायारस' का ढांचा खड़ा किया है जो रसामास कोटि જારે! 'हरिभक्तिरसामृतसिन्धु' મેં रस को एकत्व से जोड़ दिया गया है श्रौर कृष्ण જો 'श्रखिलरसामृतमूर्ति' बताया है 12 रस केवल कृष्ण के संदर्भ में ही संभव है, इसकी मर्यादा भी बना दी गई है”
परिकल्पना नए मानव की
आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000
लोक कला के नये मुहावरे गढ़ते : यामिनी राय के चित्र
Rajendra Prasad · Sambodhi, 2018
अद्वैत वेदान्त एवं शुद्धाद्वैत में तत्त्वमीमांसा : एक दृष्टि
Namita Kapoor · Sambodhi, 2012