Articles discussing राम
जैन रामकथाओं के परिप्रेक्ष्य पुष्पदन्त की रामकथा
सुशो प्रीति जैन · Jain Vidya, 1985
“। जैनरामकथा दो धारात्रों में उपलब्ध है ।* एक धारा मे विमलसूरि, रविषेण व स्वयंभू द्वारा मान्य શ્રોર दूसरी धारा में गुणाभद्र व पुष्पदन्त द्वारा मान्य कथाएं हैं”
जैन पुराणों में प्रतिबिम्बित सामाजिक एवं नैतिक जीवन मुल्य
Rajendra Kumar Bansal · Jnana Desana, 2010
गीता और कालिदास
Gautam Patel · Sambodhi, 1974
जम्बूसामिचरिउ की कथानकसूष्टि और हिन्दी काव्य-परम्परा
लोक कला के नये मुहावरे गढ़ते : यामिनी राय के चित्र
Rajendra Prasad · Sambodhi, 2018
“यामिनी राय को विषय-वस्तु चुनने में कोई कठिनाई नहीं થી । उनके विषय इर्द-गिर्द જે लोगों से लिये गये हैं, खास तौर पर ब्राउल, बाओरी, सन्थाल और मल्ल जैसे ग्रामीण जन बहुलता से उनके चित्रों में प्रकट होते हैं”
अपभ्रंश के संवेदनशील महाकवि पुष्पदंत
डां० देवेन्रकुमार શાસ્ત્રी · Jain Vidya, 1985
पार्थिव धर्म
विद्यानिवास मिश्र · Jain Bharati, 2001
परिकल्पना नए मानव की
आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000
महाकवि पुष्पदंत और उनकी रसाभिव्यक्ति
डॉं० प्रेमचंद रांवका · Jain Vidya, 1985
धर्म और विज्ञान : कैसे पटेगी बीच की खाई
दयालचन्द्र सोनी · Jain Bharati, 2000
स्वयं सत्य खोजें
Jain Bharati, 2001
बीमारियां : समाधान प्राणायाम
साध्वी राजीमती · Jain Bharati, 2000
निर्धूम दीप की अप्रकप लौ
Jain Bharati, 2001