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भगवान महावीर

60 articles in the archive discuss भगवान महावीर, from Jain Bharati, Jnana Desana, Jain Vidya and other journals (1993–2013). Open any article for its summary, citation and original PDF.

60 articles

Articles discussing भगवान महावीर

  1. महावीर का प्रखर प्रवक्ता कुंडकौलिक

    Jain Bharati, 2000

    “भगवान महावीर कहते हैं कि प्रत्येक पल की प्राप्ति के लिए क्रिया आवश्यक है, पुरुषार्थं जरूरी है, जबकि गोशालक ठीक इसके विपरीत कहता है।”
  2. महावीर के सूत्र : समता और समन्वय

    आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2001

  3. भगवान महावीर की धर्म-क्रांति

    प्रो. महावीर सरन जैन · Jain Bharati, 2001

  4. अहिंसा को जानो तो

    Jain Bharati, 2001

  5. जैन साहित्य मे प्राप्त आर्थिक चिंतन

    Akanksha Dungarwal · Jnana Desana, 2010

    “ऐसी विषम स्थिति में भगवान महावीर की विचारधारा कुछ अंषों में भी त्राण बन सकती है, तो एक बड़ी उपलब्धि हो जायेगी।”
  6. भगवती सूत्र में परमाणु

    Om Prakash · Jnana Desana, 2010

    “परमाणु की शाश्वतता या अशाश्वतता के विषय में गौतम की जिज्ञासा को शांत करते हुए भगवान महावीर ने बताया कि परमाणु शाश्वत तथा अशाश्वत दोनों हैं, क्योंकि द्रव्य दृष्टि से परमाणु शाश्वत है, वह हमेशा रहा है और रहेगा भी, किंतु पर्याय दृष्टि से परमाणु अशाश्वत है।”
  7. सदाचार के सूत्र

    साध्वी शुभ्रयशा · Jain Bharati, 2001

  8. अहिंसा-हिंसा : विविध पहलू

    Jain Bharati, 2001

  9. अहिंसा का मनोविज्ञान

    Saroj Kothari · Jnana Desana, 2010

  10. राष्ट्रीय संगोष्ठी के विविध सत्रों में दिये गये अध्यक्षीय एवं मुख्य अतिथि के उद्बोधन

    Prof. Narendra Dhakad, Prof. M. L. Kothari, Prof. Shrenik Bandi, Pt. Ratanlal Jain Shastri, Prof. Gokul Chandra Jain · Jnana Desana, 2010

  11. लोकतंत्र की मर्यादाएं

    Jain Bharati, 2001

    “डॉ. राधाकृष्णन् ने कहा था--“आज का लोकतंत्र भगवान महावीर के अनेकांत दर्शन का फलित है।'”
  12. विच्छिन्न परंपरा को पुनर्जीवन

    साध्वी शुभ्रयशा · Jain Bharati, 2001

  13. आत्म-नियंत्रण से कषाय-मुक्ति

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001

    “भगवान महावीर ને आत्म-नियंत्रण के, लेश्या-शुद्धि के, अध्यवसाय -शुद्धि के तीन बाहरी सूत्र बतलाए, जो बाहर से हमें प्रभावित करते હેં! वे तीन सूत्र हैं--उपवास, कायोत्सर्ग और प्रतिसंलीनता।”
  14. संतुलन का सेतु है अनेकांत

    Jain Bharati, 2001

    “भगवान महावीर ने जो अनेकांत का दर्शन दिया वह आज लोकतंत्र में फलित हो रहा है।”
  15. अनेकांत: सामाजिक अभिप्राय

    शुभू पटवा · Jain Bharati, 2001

  16. क्षमा की सरिता : निमज्जन के क्षण

    मुनि मदनकुमार · Jain Bharati, 2000

  17. समता को कैसे साधे

    साध्वी विश्रुतविभा · Jain Bharati, 2000

  18. अहिंसा की अर्थवत्ता

    आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000

  19. कलिकाल गणधर : आचार्य समन्तभद्र

    डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1996

    “भगवान महावीर की आचार्य-परम्परा में स्वामी समन्तभद्र का अतिविशिष्ट स्थान होने के कारण T आचार्यो ने उन्हें कलिकाल गणधर, भारत-भूषण, कविन्द्र भास्वान, आद्यस्तुतिकार, भावी तीर्थकर, भद्रमूर्ति और जिन-शासन के प्रणेता जैसी अति सम्मानित उपाधियोंसहित स्मरण किया है”
  20. एक्का मणुस्सजाई

    Jain Bharati, 2001

  21. भारतीय परपरा में सन्यास

    साध्वी पीयूषप्रभा · Jain Bharati, 2001

    “भगवान महावीर ने कहा कि कोई केवल मुंडित होने से श्रमण नहीं होता, किंतु जो समत्व की साधना करता है वही वस्तुतः श्रमण होता है।”
  22. अनेकान्त के प्रतिष्ठापक आचार्य अकलंकदेव

    डॉ. अशोककुमार जैन · Jain Vidya, 1999

  23. संयम की बात बजरिए भूकंप

    Jain Bharati, 2001

    “अणुयुद्ध से विश्व की होने वाली स्थिति का जो वर्णन वैज्ञानिक करते हैं, भगवान महावीर ने ढाई हजार वर्ष पहले ही उसका विस्तृत चित्र प्रस्तुत कर दिया।”
  24. परस्पर भावयन्तः

    श्रीमन्नारायण · Jain Bharati, 2000

  25. विज्ञान के क्षेत्र में अहिंसा की प्रासंगिकता

    Late Shri Sureshchandra Barolia · Jnana Desana, 2011

  26. पण्डित श्री आशाधरजी कौ दृष्टि में 'अध्यात्म-योग-विद्या'

    डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 2001

  27. कर्म-सिद्धांत के ज्ञाता नेमिचन्द्राचार्य : व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व

    डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1997

  28. समया धम्म मुदाहरे मुणी

    Jain Bharati, 2001

  29. यह जो देखते हैं

    Jain Bharati, 2001

  30. महावीर को सीमा में बांधने का प्रयास न हो -आचार्यश्री महाप्रज्ञ

    Jain Bharati, 2001

  31. युवा पीढ़ी : दशा-दिशा

    साध्वी विमलप्रज्ञा · Jain Bharati, 2001

    “भगवान महावीर, बुद्ध, गांधी, भिक्षु और तुलसी के विचार तो उनके लिए मात्र इतिहास की वस्तु बनकर रह गए हैं ।”
  32. अनुशासन के मंन्रदाता जयाचार्यं

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000

  33. मर्यादा : अनुशासन का आधार

    Jain Bharati, 2001

  34. जर्द होती जीवन-पोथी

    Jain Bharati, 2000

    “भगवान महावीर ने 2526 वर्ष पूर्व जो कुछ कहा वह आज भी समीचीन”
  35. Jain evam Gandhi Achar Darshan ka Tulnatmak Adhyayan

    Tribhuvan Nath Tripathi · Sambodhi, 2005

  36. कषाय विवेचना

    Jain Bharati, 2001

  37. स्वास्थ्य रक्षण : जैनाचार्यों के अनुसार

    Sushila Salgaiya · Jnana Desana, 2010

  38. सत्य-यश : विचारणीय पहलू

    Jain Bharati, 2001

  39. प्रकृति के रिश्तों को पहचानें

    Jain Bharati, 2001

  40. आध्यात्मिक आजादी के लिए

    Jain Bharati, 2001

  41. अनाहार सूत्र की साधिका

    Jain Bharati, 2000

  42. लक्खण नहि पलटेेे लाखां

    आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000

  43. आध्यात्मिक अर्थशास्त्र की प्रस्तावना

    नन्दकिशोर आचार्य · Jain Bharati, 2001

  44. नमोस्तु तस्मे तपसेડद्भुताय

    आचार्यश्री महाश्रमण · Jain Bharati, 2000

  45. समाधि : चैतन्य का अनुभव

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001

  46. आचार्य श्री कुन्दकुन्द एवं उनका दर्शनपाहुड

    डॉ. कुलदीपकुमार · Jain Vidya, 2013

  47. साधन-साध्य : एक मीमांसा

    आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2001

  48. कायोत्सर्ग - साधना ओर फल

    साध्वी राजीमती · Jain Bharati, 2001

  49. हिसा विरति-अविरति-आचाराग के परिप्रेक्ष्य से

    साध्वी शुभ्रयशा · Jain Bharati, 2001

  50. परिकल्पना नए मानव की

    आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000

  51. सच और साफगोई

    Jain Bharati, 2000

  52. निशस्त्रीकरण का मंत्र--अहिसा

    Jain Bharati, 2001

  53. पुण्य मीमांसा

    मुनि रमेशकुमार · Jain Bharati, 2001

    “भगवान महावीर ने कहा है--तपस्या इस लोक વ परलोक के लिए नहीं करनी चाहिए।”
  54. स्वामी समन्तभद्र की वाणी के आलोक में दैव और पुरुषार्थ

    डॉ. सूरजमुखी जैन · Jain Vidya, 1996

    “श्रुतधराचार्य स्वामी समन्तभद्र ने भगवान महावीर की वाणी के अनुसार स्याद्वादनय को अपनाते हुए दैव और पुरुषार्थ दोनों के महत्व को स्वीकार किया ।”
  55. प्रतिहिंसा से शांति

    Jain Bharati, 2001

  56. अप्प संवोह कव्व

    डॉ. राजाराम जैन, मंडलाचार्य श्री सिंह नंदि, डॉ. कस्तूरचन्द्र 'सुमन' · Jain Vidya, 1993

  57. स्वयं सत्य खोजें

    Jain Bharati, 2001

  58. जिन-सूत्र के ज्ञाता एवं कलिकाल सर्वज्ञ : आचार्य वीरसेन

    डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1993

  59. तीर्थकर एवं मंगलमय-भगवान महावीर

    Late Pandit Nathuram Dongariya Jain · Jnana Desana, 2011

  60. नंगे पैर

    वेंकटेश माडगूलकर · Jain Bharati, 2000