Articles discussing आचार्य वीरसेन
आचार्य वीरसेन और उनकी कालजयी टीका 'धवला'
डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव · Jain Vidya, 1993
“इस दृष्टि से टीकाकार भी एक ग्रन्थकार के रूप में ही मानार्हं होते थे इसी प्रकार आचार्य वीरसेन (9वीं शती, ईसवी- सन् 816) द्वारा लिखी गई ' धवला ' टीका ने एक स्वतन्त्र ग्रन्थ की इयत्ता आयत्त कर ली है और वीरसेनाचार्य एक ग्रन्थकार आचार्य के रूप में शाश्वत्प्रतिष्ठ हो गये हैं”
पंचस्तूपान्वयी भट्टारक श्री वीरसेन स्वामी
श्री कुन्दनलाल जैन · Jain Vidya, 1993
“उपर्युक्त उद्धरणों से प्रमाणित होता है कि केवल आचार्य वीरसेन स्वामी દી नहीं अपितु उनके गुरु आदि और पश्चात शिष्य-प्रशिष्य भी पंचस्तुपान्वयी शाखा સે संबंधित बने रहे।”
आचार्य वीरसेन और उनका ज्ञानकेन्द्र
आचार्य राजकुमार जैन · Jain Vidya, 1993
“आचार्य वीरसेन अपने समय के अप्रतिम विद्वान થે । उनका बुद्धि-वैभव अत्यन्त अगाध और पण्डित्यपूर्णं થા।”
जिन-सूत्र के ज्ञाता एवं कलिकाल सर्वज्ञ : आचार्य वीरसेन
डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1993
“जैन दर्शन के कर्म-सिद्धान्त की प्रामाणिक प्ररूपणा के क्षेत्र में आचार्य वीरसेन के अद्भुत योगदान के कारण वे कलिकाल-सर्वज्ञवत् मान्य हुए है।”
सम्पादकीय
Jain Vidya, 1993
“आचार्य वीरसेन पंचस्तूपान्वयी शाखा से सम्बन्धित थे । पंचस्तूपान्वयी शाखा मथुरा या इसके आस-पास के प्रदेश से सम्बन्धित”
आचार्य श्री कुन्दकुन्द एवं उनका दर्शनपाहुड
डॉ. कुलदीपकुमार · Jain Vidya, 2013
कर्म-सिद्धांत के ज्ञाता नेमिचन्द्राचार्य : व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व
डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1997
सम्पादकीय
Jain Vidya, 1997
जैन वनस्पतिकी
Ashok Jain · Jnana Desana, 2010