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आचार्य समन्तभद्र

10 articles in the archive discuss आचार्य समन्तभद्र, from Jain Vidya (1993–2011). Open any article for its summary, citation and original PDF.

10 articles

Articles discussing आचार्य समन्तभद्र

  1. आचार्य समन्तभद्र : व्यक्तित्व और कर्तृत्व

    डॉ. गुलाबचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1996

  2. युक्त्यनुशासन और आचार्य समन्तभद्र

    विद्यावाचस्पति डॉ. श्रीरंजनसूरिदेव · Jain Vidya, 1996

  3. आचार्य समन्तभद्र और उनकी कृति आप्तमीमांसा/ देवागम स्तोत्र

    डॉ. रमेशचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1996

    “आचार्य समन्तभद्र द्वारा प्रणीत रचनाएं निम्नलिखित मानी जाती हैं - 1. वृहत्स्वयम्भू स्तोत्र 2. स्तुतिविद्या 3. आप्तमीमांसा યા देवागम स्तोत्र 4. युक्त्यनुशासन 5. ... रत्नकरण्ड श्रावकाचार 6. जीवसिद्धि 7. प्रमाण पदार्थ 8. त्वानुशासन 9. प्राकृत व्याकरण 10. कर्मप्राभृत टीका”
  4. रत्नकरण्ड श्रावकाचार की पारिभाषिक शब्दावलि : प्रयोग और प्रयोजन

    डॉ. महेन्द्रसागर प्रचंडिया · Jain Vidya, 1996

    “आचार्य समन्तभद्र તે श्रावकाचार में विविध व्रतो के संदर्भ मे अतिचार शब्द का प्रयोग किया है”
  5. शिवार्यकृत भगवती आराधना में चित्रित “समाहित चित्त” का स्वरूप एवं उपयोग : सल्लेखना के परिप्रेक्ष्य में

    डॉ. पी. सी. जैन · Jain Vidya, 2011

    “सल्लेखना है। आचार्य समन्तभद्रः के अनुसार उपायरहित उपसर्ग, दुष्काल, बुढ़ापा तथा असाध्य रोग वगैरह के आने पर रत्नत्रय स्वरूप धर्म का उत्तम रीति से पालन करने के लिए शरीर छोड़ना વેલા है।”
  6. एक में अनेक : विराट व्यक्तित्व के धनी आचार्य प्रभाचन्द्र

    डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 2010

  7. आचार्य वीरसेन और उनकी कालजयी टीका 'धवला'

    डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव · Jain Vidya, 1993

  8. पंचस्तूपान्वयी भट्टारक श्री वीरसेन स्वामी

    श्री कुन्दनलाल जैन · Jain Vidya, 1993

  9. आचार्य श्री प्रभाचन्द्र का व्यक्तित्व और कर्तृत्व

    डॉ. गुलाबचन्द जैन · Jain Vidya, 2010

  10. पण्डितप्रवर आशाधर के सागारधर्मामृत की प्रमुख विशेषताएं

    डॉ. रमेशचन्द जैन · Jain Vidya, 2001