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स्वामी समन्तभद्र

7 articles in the archive discuss स्वामी समन्तभद्र, from Jain Vidya (1990–2011). Open any article for its summary, citation and original PDF.

7 articles

Articles discussing स्वामी समन्तभद्र

  1. कलिकाल गणधर : आचार्य समन्तभद्र

    डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1996

    “भगवान महावीर की आचार्य-परम्परा में स्वामी समन्तभद्र का अतिविशिष्ट स्थान होने के कारण T आचार्यो ने उन्हें कलिकाल गणधर, भारत-भूषण, कविन्द्र भास्वान, आद्यस्तुतिकार, भावी तीर्थकर, भद्रमूर्ति और जिन-शासन के प्रणेता जैसी अति सम्मानित उपाधियोंसहित स्मरण किया है”
  2. संपादकीय

    Jain Vidya, 1996

    ““भगवान महावीर की आचार्य-परम्परा में स्वामी समन्तभद्र का अतिविशिष्ट स्थान होने के कारण परवती आचार्यो ने उन्हे कलिकाल गणधर, भारत-भूषण, कविन्द्र भास्वान्, आद्य-स्तुतिकार, भावी तीर्थकर, भद्रमूर्ति और जिन-शासन के प्रणेता जैसी अति सम्मानित उपाधियों सहित स्मरण किया है”
  3. स्वामी समन्तभद्र की वाणी के आलोक में दैव और पुरुषार्थ

    डॉ. सूरजमुखी जैन · Jain Vidya, 1996

    “श्रुतधराचार्य स्वामी समन्तभद्र ने भगवान महावीर की वाणी के अनुसार स्याद्वादनय को अपनाते हुए दैव और पुरुषार्थ दोनों के महत्व को स्वीकार किया ।”
  4. शिवार्यकृत भगवती आराधना में चित्रित “समाहित चित्त” का स्वरूप एवं उपयोग : सल्लेखना के परिप्रेक्ष्य में

    डॉ. पी. सी. जैन · Jain Vidya, 2011

  5. समयसार का दार्शनिक पृष्ठ

    डॉ. दरबारीलाल कोठिया · Jain Vidya, 1990

  6. पं. आशाधरजी द्वारा प्रतिपादित सद्गृहस्थ का लक्षण और श्रावक के आठ मूलगुण

    डॉ. सूरजमुखी जैन · Jain Vidya, 2001

  7. रत्नकरण्ड श्रावकाचार की पारिभाषिक शब्दावलि : प्रयोग और प्रयोजन

    डॉ. महेन्द्रसागर प्रचंडिया · Jain Vidya, 1996