Articles discussing आचार्य प्रभाचन्द्र
एक में अनेक : विराट व्यक्तित्व के धनी आचार्य प्रभाचन्द्र
डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 2010
“आचार्य प्रभाचन्द्र एक ऐसे अनोखे, अनुपम आचार्य हैं जिनमे अनेक आचार्यो के व्यक्तित्व समाए हुए हैं તથા उनकी कृतिर्या जो भाष्य हैं, वे स्वतंत्र ग्रन्थ जैसे प्रसिद्ध”
आचार्य श्री प्रभाचन्द्र का व्यक्तित्व और कर्तृत्व
डॉ. गुलाबचन्द जैन · Jain Vidya, 2010
“आचार्य प्रभाचन्द्र न्याय और व्याकरण के क्षेत्र મેં बहुचर्चित विद्वान् रहे हैं।”
आचार्य प्रभाचन्द्र द्वारा प्रतिपादित प्रमाण : स्वरूप एवं विश्लेषण
डॉ. एच. सी. जैन · Jain Vidya, 2010
सम्पादकीय
Jain Vidya, 2010
““आचार्य प्रभाचन्द्र का समय ईस्वी सन् 980 से 1065 तक होना माना”
आचार्य प्रभाचन्द्र के ग्रन्थों में 'तर्क प्रमाण' की अवधारणा
डॉ. राजकुमारी जैन · Jain Vidya, 2010
“आचार्य प्रभाचन्द्र इस प्रक्रिया को परिभाषित करते हुए कहते हैं कि साधन के होने पर साध्य के भी विद्यमान होने (अन्वय) और साधन का अभाव होने पर साध्य के भी नहीं होने (व्यतिरेक) के अनेक दृष्टान्तो के प्रत्यक्षपूर्वक घटित होनेवाली विचारात्मक प्रक्रिया तर्क प्रमाण कहलाती है।”