Articles discussing गौतम गणधर
जम्बूस्वामीचरित विषयक जैनसाहित्य
सुदंसणचरिउ का साहित्यिक मूल्यांकन
नयनंदि · Jain Vidya, 1987
आचार्य कुन्दकुन्द कृत 'अष्टपाहुड' में 'जीवन-मूल्य'
डॉ. प्रेमचन्द्र रांवका · Jain Vidya, 2013
महाकवि वीर और उनका जम्बूसामिचरिउ एक समीक्षात्मक अध्ययन
सुदंसणचरिउ का काव्यात्मक वैभव
प्रवचनसार का सार
डॉ. प्रेमचन्द रॉवका · Jain Vidya, 1990
“भगवान् महावीर श्रौर गौतम गणधर के पश्चात् प्रातःवन्दनीय कलिकालसवंज्ञ श्री पद्मनन्दि कुन्दकुन्दाचाये भास्कर सदश मासमान हैं जिन्होंने विक्रम की प्रथम જતી में प्राकृत वाणी में यह सिद्ध किया कि कोई भी मानव परमतत्त्व જો भ्रपनी स्वानुशुति द्वारा प्राप्त कर सकता है”
जिन-सूत्र के ज्ञाता एवं कलिकाल सर्वज्ञ : आचार्य वीरसेन
डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1993
जैनधर्म और श्रुतदेवी सरस्वती
Sagarmal Jain · Sambodhi, 2010
आचार्य श्री कुन्दकुन्द एवं उनका दर्शनपाहुड
डॉ. कुलदीपकुमार · Jain Vidya, 2013
जंबसामिचरिउ का साहित्यिक मूल्यांकन
आचार्य कुन्दकुन्द की ग्रन्थत्रयी के टीकाकार
डां० शुद्धात्मप्रभा · Jain Vidya, 1990