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समयसार

22 articles in the archive discuss समयसार, from Jain Vidya, Jain Bharati, Jnana Desana (1988–2013). Open any article for its summary, citation and original PDF.

22 articles

Articles discussing समयसार

  1. समयसार की रचना में आचार्य कुन्दुकुन्द की दृष्टि

    पं० बंशीघर व्याकरणाचाय · Jain Vidya, 1990

    “1--समयसार का श्रालोडन करने से मैं इस निष्कषं पर पहुँचा हूं कि उसकी रचना श्राचाय॑ कुन्दकुन्द ने इस दृष्टि से की है कि सम्पूरं मानवसमष्टि उसे पढ़कर उसके श्रमिप्राय' को समभे श्रौर उस श्रमिप्रायके अनुसार श्रपनी जीवन-प्रद्त्तियों को नैतिकरूप देने का दृढ़ संकल्प જરે जिससै वह जीवत જે श्र॑त तक सुखपूवेक जिन्दा रह सके”
  2. कुन्दकुन्द का वस्तु-स्वातन्त्रय-सिद्धान्त

    राजकुमार छाबड़ा · Jain Vidya, 1990

  3. कुन्दकुन्दाचार्य के ग्रन्थों में सम्यग्चारित्र की अवधारणा

    डॉ. राजकुमारी जैन · Jain Vidya, 1990

  4. आचार्य कुन्दकुन्द की ग्रन्थत्रयी के टीकाकार

    डां० शुद्धात्मप्रभा · Jain Vidya, 1990

    “समयसार कुन्दकुन्द की एक ऐसी श्रेष्ठ रचना है जो विगत दो हजार वर्षों से जैनसन्तों का मामंदशंन करती AT रही है ।”
  5. कुन्दकुन्द साहित्य में समकालीन सांस्कृतिक जीवन की भांकियां

    डॉ. (श्रीमती) विद्यावती जैन · Jain Vidya, 1990

  6. प्राचार्य कुन्दकुन्द की देन

    डां° देवेन्द्कुमार शास्त्री · Jain Vidya, 1990

  7. आचार्य कुन्दकुन्द: निश्चय और व्यवहार

    Jain Vidya, 1990

  8. दार्शनिक व्याख्याता कुन्दकुन्दाचार्य के विचार और विवेचना

    डॉ. झादित्य प्रचण्डिया · Jain Vidya, 1990

  9. मूलसंघाग्रणी मुनीदवर कुन्दकुन्दाचार्य

    डॉ. ज्योतिप्रसाद जैन · Jain Vidya, 1990

  10. द्रव्य-पर्यायात्मक वस्तु ज्ञान का विषय

    डॉ. राजकुमारी जैन · Jain Vidya, 1999

  11. अष्टपाहुड और जैन साधु

    डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 2013

  12. इस अंक के सहयोगी रचनाकार

    डॉ० उदयचंद जैन · Jain Vidya, 1990

  13. तत्त्वार्थराजवार्तिक और कर्मबन्ध के प्रत्यय

    डॉ. (श्रीमती) कुसुम पटोरिया · Jain Vidya, 1999

  14. अनेकांत का फलित नयवाद

    कुमार अनेकान्त जैन · Jain Bharati, 2001

  15. आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा प्रतिपादित अमृतकुम्भ और विषकुम्भ

    पं° जगन्मोहनलाल शास्त्री · Jain Vidya, 1990

  16. आगम और आधुनिक परिप्रेक्ष्य में भ्रमणाचार

    Shreyanshkumar Jain · Jnana Desana, 2010

  17. पुण्य मीमांसा

    मुनि रमेशकुमार · Jain Bharati, 2001

  18. परमप्पयासु में बंध-मोक्ष संबंधी विचार

    Jain Vidya, 1988

  19. कुन्दकुन्द-साहित्य का साहित्यिक मूल्यांकन

    डॉ. राजाराम जैन · Jain Vidya, 1990

  20. प्रवचनसार का सार

    डॉ. प्रेमचन्द रॉवका · Jain Vidya, 1990

  21. आचार्य कुन्दकुन्द और यथार्थ - प्रसद्‌ भृत व्यवहारनय

    Jain Vidya, 1990

  22. आचार्य कुन्दकुन्द कृत 'अष्टपाहुड' में 'जीवन-मूल्य'

    डॉ. प्रेमचन्द्र रांवका · Jain Vidya, 2013