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भावपाहुड

8 articles in the archive discuss भावपाहुड, from Jain Vidya (1990–2013). Open any article for its summary, citation and original PDF.

8 articles

Articles discussing भावपाहुड

  1. अष्टपाहुड और जैन साधु

    डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 2013

    “जिनमार्ग मे भावचिह की प्रधानता प्रतिपादित करते हुए आचार्य कुन्दकुन्द ने -भावपाहुड' મેં कहा कि पहले मिथ्यात्व आदि दोषों को छोड़कर भाव से अतरग नग्न होकर शुद्धात्मा का श्रद्धान, ज्ञान एवं आचरण करे पश्चात् द्रव्य સે बाह्य मुनिमुद्रा (लिंग) प्रकट करे, यही जिनाज्ञा एवं मोक्षमार्ग है”
  2. कुन्दकुन्द साहित्य में समकालीन सांस्कृतिक जीवन की भांकियां

    डॉ. (श्रीमती) विद्यावती जैन · Jain Vidya, 1990

  3. कुन्दकुन्दाचार्य के ग्रन्थों में सम्यग्चारित्र की अवधारणा

    डॉ. राजकुमारी जैन · Jain Vidya, 1990

  4. अष्टपाहुड : एक विहंगावलोकन

    डॉ. हुकमचन्द भारिल्ल · Jain Vidya, 2013

  5. अष्टपाहुडों का काव्यशास्त्रीय अध्ययन

    डॉ. उदयचन्द्र जैन · Jain Vidya, 2013

  6. मुनिराज ही जिनबिम्ब एवं जिनप्रतिमा

    डॉ. (श्रीमती) कुसुम पटोरिया · Jain Vidya, 2013

  7. दर्शनपाहुड : एक अध्ययन

    डॉ. कस्तूरचन्द जैन “सुमन” · Jain Vidya, 2013

  8. कुन्दकुन्द-साहित्य का साहित्यिक मूल्यांकन

    डॉ. राजाराम जैन · Jain Vidya, 1990