Articles discussing नियमसार
कुन्दङ्कन्द साहित्य में सर्वज्ञ का स्वरूप
पण्डित रतनचन्द भारित्ल · Jain Vidya, 1990
दार्शनिक व्याख्याता कुन्दकुन्दाचार्य के विचार और विवेचना
डॉ. झादित्य प्रचण्डिया · Jain Vidya, 1990
श्वेताम्बर अर्धमागधी आगमों के अन्तर्गत प्रकीर्णिकों की कुछ गाथाओं का पाठ‑निर्धारण
K. R. Chandra · Sambodhi, 2001
“इस प्रकार स्पष्ट है कि किसी पद्म में 'मूलाचार' का पाठ छन््द और अर्थ की दृष्टि से उपयुक्त प्रतीत नहीं होता है तो कहीं पर मूलाचार'ं और नियमसार' के पाठ परवर्तीकाल के प्रतीत होते हैं ।”
कुन्दकुन्दाचार्य के ग्रन्थों में सम्यग्चारित्र की अवधारणा
डॉ. राजकुमारी जैन · Jain Vidya, 1990
मूलसंघाग्रणी मुनीदवर कुन्दकुन्दाचार्य
डॉ. ज्योतिप्रसाद जैन · Jain Vidya, 1990
आचार्य कुन्दकुन्द कृत 'अष्टपाहुड' में 'जीवन-मूल्य'
डॉ. प्रेमचन्द्र रांवका · Jain Vidya, 2013
कुन्दकुन्द साहित्य में समकालीन सांस्कृतिक जीवन की भांकियां
प्रवचनसार का सार
डॉ. प्रेमचन्द रॉवका · Jain Vidya, 1990
आचार्य कुन्दकुन्द: निश्चय और व्यवहार
Jain Vidya, 1990