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नियमसार

9 articles in the archive discuss नियमसार, from Jain Vidya, Sambodhi (1990–2013). Open any article for its summary, citation and original PDF.

9 articles

Articles discussing नियमसार

  1. कुन्दङ्कन्द साहित्य में सर्वज्ञ का स्वरूप

    पण्डित रतनचन्द भारित्ल · Jain Vidya, 1990

  2. दार्शनिक व्याख्याता कुन्दकुन्दाचार्य के विचार और विवेचना

    डॉ. झादित्य प्रचण्डिया · Jain Vidya, 1990

  3. श्वेताम्बर अर्धमागधी आगमों के अन्तर्गत प्रकीर्णिकों की कुछ गाथाओं का पाठ‑निर्धारण

    K. R. Chandra · Sambodhi, 2001

    “इस प्रकार स्पष्ट है कि किसी पद्म में 'मूलाचार' का पाठ छन्‍्द और अर्थ की दृष्टि से उपयुक्त प्रतीत नहीं होता है तो कहीं पर मूलाचार'ं और नियमसार' के पाठ परवर्तीकाल के प्रतीत होते हैं ।”
  4. कुन्दकुन्दाचार्य के ग्रन्थों में सम्यग्चारित्र की अवधारणा

    डॉ. राजकुमारी जैन · Jain Vidya, 1990

  5. मूलसंघाग्रणी मुनीदवर कुन्दकुन्दाचार्य

    डॉ. ज्योतिप्रसाद जैन · Jain Vidya, 1990

  6. आचार्य कुन्दकुन्द कृत 'अष्टपाहुड' में 'जीवन-मूल्य'

    डॉ. प्रेमचन्द्र रांवका · Jain Vidya, 2013

  7. कुन्दकुन्द साहित्य में समकालीन सांस्कृतिक जीवन की भांकियां

    डॉ. (श्रीमती) विद्यावती जैन · Jain Vidya, 1990

  8. प्रवचनसार का सार

    डॉ. प्रेमचन्द रॉवका · Jain Vidya, 1990

  9. आचार्य कुन्दकुन्द: निश्चय और व्यवहार

    Jain Vidya, 1990