Articles discussing श्रावक
पण्डितप्रवर आशाधर के सागारधर्मामृत की प्रमुख विशेषताएं
डॉ. रमेशचन्द जैन · Jain Vidya, 2001
सागारधर्मामृत में वर्णित प्रतिमा : प्रयोग और प्रयोजन
डॉ. महेन्द्रसागर प्रचंडिया · Jain Vidya, 2001
“श्रावक के दर्शन, ज्ञान और चारित्र विषयक विकास-क्रम का नाम है प्रतिमा।”
सागारधर्मामृत में भक्ष्य-अभक्ष्य का विवेचन
श्रीमती अर्चना प्रचण्डिया · Jain Vidya, 2001
“सागारधर्मामृत ' में जहाँ श्रावकों के मूल व उत्तर गुणों आदि की चर्चा हुई है, वहीं श्रावकों के लिए कौन-से पदार्थ खाने योग्य हैं और कौन-से त्यागने”
अमितगति श्रावकाचार में श्रावक की जीवनचर्या
डॉ. રપેશચર जैन, ग्राचायं अमितगति · Jain Vidya, 1993
“श्रावकाचार के प्रारम्भ में ત્રાચાર્યે श्रमितगत्ति ने पंचपरमेष्ठी का जो स्मरण किया है, वह हृदयहारो है”
अष्टपाहुड और जैन साधु
डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 2013
क्षमा की सरिता : निमज्जन के क्षण
मुनि मदनकुमार · Jain Bharati, 2000
प्रवचनसार का सार
डॉ. प्रेमचन्द रॉवका · Jain Vidya, 1990
दार्शनिक व्याख्याता कुन्दकुन्दाचार्य के विचार और विवेचना
डॉ. झादित्य प्रचण्डिया · Jain Vidya, 1990
सम्पादकीय
डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 2013
व्यवहार और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय
Dharmachand Jain · Jnana Desana, 2008
आचार्य पूज्यपाद का युगबोध
डा. संजीव प्रचंडिया · Jain Vidya, 1991
रोचक एंव ज्ञानवर्द्धक दस्तावेज (ज्ञान के हिमालय द्वारा श्री सुरेश 'सरल', जबलपुर)
Anupam Jain · Jnana Desana, 2008
आध्यात्मिक आजादी के लिए
Jain Bharati, 2001