Articles discussing दिगम्बर
अकलंकदेव की कृति तत्त्वार्थवार्तिक
डॉ. रमेशचन्द जैन · Jain Vidya, 1999
अष्टपाहुड और जैन साधु
डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 2013
मुनि कनकामर : व्यक्तित्व और कृतित्व
मुनि कनकामर, (श्रीमती) अलका प्रचण्डिया 'दीति' · Jain Vidya, 1988
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1990
“भगवान् महावीर જે नाम से विख्यात राजस्थान જે सवाई माधोपुर जिले के हिण्डौन उप- खण्ड में स्थित दिगम्बर जेन श्रतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी सम्पूरौ भारत મેં शायद एकमात्र ऐसा तीथं है जहां से कई लोकहितकारी प्रवृत्तियां संचालित होती ह, जो सच्चे શ્ર में तीथं है”
प्रवचनसार का सार
डॉ. प्रेमचन्द रॉवका · Jain Vidya, 1990
रत्नकरण्ड श्रावकाचार का प्रतिपाद्य
श्री राजीव प्रचंडिया · Jain Vidya, 1996
आचार्य समंतभद्र की अनुपम कृति रत्नकरंड श्रावकाचार
श्रीमती प्रभावती जैन · Jain Vidya, 1996
श्वेताम्बर अर्धमागधी आगमों के अन्तर्गत प्रकीर्णिकों की कुछ गाथाओं का पाठ‑निर्धारण
K. R. Chandra · Sambodhi, 2001
जम्बूसामिचरिउ की कथानकसूष्टि और हिन्दी काव्य-परम्परा
रत्नकरण्ड श्रावकाचार की पारिभाषिक शब्दावलि : प्रयोग और प्रयोजन
डॉ. महेन्द्रसागर प्रचंडिया · Jain Vidya, 1996
समयसार का समय
डॉ. महेन्द्रसागर प्रचंडिया · Jain Vidya, 1990
दर्शनपाहुड : एक अध्ययन
डॉ. कस्तूरचन्द जैन “सुमन” · Jain Vidya, 2013