Articles discussing समन्तभद्र
सारस्वताचार्य समन्तभद्र : व्यक्तित्व और कर्तृत्व
डॉ. आदित्य प्रचण्डिया 'दीप्ति' · Jain Vidya, 1996
“सारस्वताचार्य समन्तभद्र असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी तथा श्रुतधर आचार्य थे। जैनेन्द्र व्याकरण मे समागत चतुष्टयं समन्तभद्रस्यं ' (सूत्र- 5.4. 168) के उल्लेख से आचार्य समन्तभद्र आचार्य पूज्यपाद (देवनन्दी) से પૂર્વવર્તી प्रमाणित होते है”
रत्नकरण्ड श्रावकाचार का प्रतिपाद्य
श्री राजीव प्रचंडिया · Jain Vidya, 1996
जिनशासन के प्रभावक आचार्य अकलंक
श्री रमाकान्त जैन · Jain Vidya, 1999
युक्त्यनुशासनालंकार में प्रतिपादित नय
समन्तभद्र के दर्शन में 'आप्त' की अवधारणा
डॉ. राजवीरसिंह शेखावत · Jain Vidya, 1996
“समन्तभद्र के अनुसारः जो नियम से वीतरागी, सर्वज्ञ ओर आगम का ईश है बह आप्तः“ है।”
Jain Darshans ka Anya Darshanon se Dvirdh Avdaan (Hindi)
Sagarmal Jain · Sambodhi, 2011
जैन-न्याय के उन्नायक : भट्ट अकलंकदेव
डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1999
सम्पादकीय
Jain Vidya, 1999
महाकवि पुष्पदंत की विचारदृष्टि एवं उपमानसृष्टि
डं० श्रीमती पुष्पलता जैन · Jain Vidya, 1985
अध्यात्म-साधक योगीन्दु और कबीर
डॉ. (श्रीमती) पुष्पलता जैन · Jain Vidya, 1988
आचार्य शिवार्य-कृत 'भगवती आराधना' में समाधिमरण
डॉ. प्रेमचन्द्र रांवका · Jain Vidya, 2011
करकण्डचरिउ में प्रतिपादित इतिहास व संस्कृति
भागचन्द्र भास्कर · Jain Vidya, 1988
आचार्य अकलंकदेव और उनका नय-विवेचन
तत्त्वार्थवार्तिक में वर्णित सम्यग्दर्शन का वैशिष्ट्य
Pulak Goel · Jnana Desana, 2011
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1990
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1991
अकलंकदेव की कृति तत्त्वार्थवार्तिक
डॉ. रमेशचन्द जैन · Jain Vidya, 1999
अनेकान्त के प्रतिष्ठापक आचार्य अकलंकदेव
डॉ. अशोककुमार जैन · Jain Vidya, 1999