Articles discussing विद्यानन्द
प्रमाण-लक्षण-निरूपपमे प्रामाणमीमांसा का अवदान
Sagarmal Jain · Sambodhi, 1989
आचार्य समन्तभद्र और उनकी कृति आप्तमीमांसा/ देवागम स्तोत्र
डॉ. रमेशचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1996
संस्कृत भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में जैन श्रमण परम्परा का अवदान
Sagarmal Jain · Sambodhi, 2012
अकलंकदेव की कृति तत्त्वार्थवार्तिक
डॉ. रमेशचन्द जैन · Jain Vidya, 1999
भट्टारक वीरसेन और उनका समय
श्री रमाकान्त जैन · Jain Vidya, 1993
“ऊपर उल्लिखित इन श्लोकों में जिन वीरसेन स्वामी का सादर गुणगान उनके समवर्ती आचार्य जिनसेन सूरि पुन्नाट और आचार्य विद्यानन्द तथा उनके शिष्य आचार्य जिनसेन द्वारा किया गया है”
कलिकाल गणधर : आचार्य समन्तभद्र
डॉ. राजेन्द्रकुमार बंसल · Jain Vidya, 1996
समन्तभद्र के दर्शन में 'आप्त' की अवधारणा
डॉ. राजवीरसिंह शेखावत · Jain Vidya, 1996
तत्त्वार्थवार्तिक में वर्णित सम्यग्दर्शन का वैशिष्ट्य
Pulak Goel · Jnana Desana, 2011