Articles discussing भगवान् महावीर
जम्बूस्वामीचरित विषयक जैनसाहित्य
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1990
“भगवान् महावीर જે नाम से विख्यात राजस्थान જે सवाई माधोपुर जिले के हिण्डौन उप- खण्ड में स्थित दिगम्बर जेन श्रतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी सम्पूरौ भारत મેં शायद एकमात्र ऐसा तीथं है जहां से कई लोकहितकारी प्रवृत्तियां संचालित होती ह, जो सच्चे શ્ર में तीथं है”
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1990
अ'ग सूत्र 'आचार'- सापेक्ष जीवसिद्धि गुरू विचक्षण पदज
आचार्य कुन्दकुन्द एवं बोधपाहुड
पं. भ्रनूपचन्द न्यायतीथं · Jain Vidya, 1990
योगसार का योग
पं. भंवरलाल पोल्याका · Jain Vidya, 1988
प्रवचनसार का सार
डॉ. प्रेमचन्द रॉवका · Jain Vidya, 1990
“भगवान् महावीर श्रौर गौतम गणधर के पश्चात् प्रातःवन्दनीय कलिकालसवंज्ञ श्री पद्मनन्दि कुन्दकुन्दाचाये भास्कर सदश मासमान हैं जिन्होंने विक्रम की प्रथम જતી में प्राकृत वाणी में यह सिद्ध किया कि कोई भी मानव परमतत्त्व જો भ्रपनी स्वानुशुति द्वारा प्राप्त कर सकता है”
मूलसंघाग्रणी मुनीदवर कुन्दकुन्दाचार्य
डॉ. ज्योतिप्रसाद जैन · Jain Vidya, 1990
महापुराण की काव्यभाषा
डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव · Jain Vidya, 1985
आचार्य कुन्दकुन्द की ग्रन्थत्रयी के टीकाकार
डां० शुद्धात्मप्रभा · Jain Vidya, 1990