Articles discussing श्रमण
अष्टपाहुड में श्रमण और श्रमणाभास
डॉ. (कु.) आराधना जैन · Jain Vidya, 2013
“अष्टपाहुड में श्रमण का स्वरूप मूलाचार या श्रमणाचार के ग्रन्थों मे वर्णित स्वरूपवत् न होकर प्रकीर्णक रूप में यत्र-तत्र बिखरा हुआ है।”
प्रवचनसार का सार
डॉ. प्रेमचन्द रॉवका · Jain Vidya, 1990
आगम और आधुनिक परिप्रेक्ष्य में भ्रमणाचार
Shreyanshkumar Jain · Jnana Desana, 2010
“जैनागम में श्रमण के आचार को निश्चय-व्यवहारचारित्र के रूप में प्रतिपादित किया गया”
भारतीय परपरा में सन्यास
साध्वी पीयूषप्रभा · Jain Bharati, 2001
“भगवान महावीर ने कहा कि कोई केवल मुंडित होने से श्रमण नहीं होता, किंतु जो समत्व की साधना करता है वही वस्तुतः श्रमण होता है।”
सम्पादकीय
डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 2013
अप्प दीपो भव
वीरेन्द्रकुमार जैन · Jain Bharati, 2001
दार्शनिक व्याख्याता कुन्दकुन्दाचार्य के विचार और विवेचना
डॉ. झादित्य प्रचण्डिया · Jain Vidya, 1990
स्वातंत्र्य चेतना : जैन चितन
साध्वी श्रुतयशा · Jain Bharati, 2000
अष्टपाहुडों का काव्यशास्त्रीय अध्ययन
डॉ. उदयचन्द्र जैन · Jain Vidya, 2013
कषाय विवेचना
Jain Bharati, 2001
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1988
Karmabandh aur Uske Karan
Shekhar Chandra Jain · Sambodhi, 2003