Articles discussing जयधवला
आचार्य वीरसेन और उनकी कालजयी टीका 'धवला'
डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव · Jain Vidya, 1993
भट्टारक वीरसेन और उनका समय
श्री रमाकान्त जैन · Jain Vidya, 1993
“वीरसेन स्वामी की कषायपाहुड की इस प्राभृत व्याख्या जयधवला का समापन उनके शिष्य जिनसेन अपर नाम जयसेनः તે उसके कलेवर में 40,000 प्रमाणश्लोकों की अभिवृद्धिकर और उसे 60,000 श्लोकों के बृहद्काय ग्रन्थ મેં परिणत करते हुए श्रीमद् गुर्जरराय द्वारा अनुपालित (शासित) वारग्रामपुर में राजा अमोघवर्ष के राज्यकाल મેં शक संवत् 759 (सन् 837 ईस्वी) में फाल्गुन शुक्ल दशमी के पूर्वाह्न में नन्दीश्वर महोत्सव के अवसर पर किया था”
जैनधर्म के मर्मज्ञ : श्री वीरसेनाचार्य
श्री वीरसेनाचार्य, श्री कन्हैयालाल · Jain Vidya, 1993
जैन वनस्पतिकी
Ashok Jain · Jnana Desana, 2010
श्री वीरसेनाचार्य (आधुनिक न्यायशास्त्र के संदर्भ में )
प्रोफेसर एल.सी. जैन, कु. प्रभा जैन · Jain Vidya, 1993