Articles discussing बुद्ध
अहिंसा की सामाजिक ताकत
नंद चतुर्वेदी · Jain Bharati, 2000
“समता, हिसा-अहिसा, लोकतंत्र, स्वाधीनता, सामाजिक न्याय ओर समाज-स्चना के बुनियादी अधिकारों के मुद्दे बुद्ध, महावीर और गांधी से आगे उस तकनीकी समाज के भी होगे जो समता की सदी से कतराने के प्रयत्न में हैं।”
परमात्मप्रकाश एक विश्लेषण
डॉ. गदाधर सिंह · Jain Vidya, 1988
असितगति-श्रावकाचार में स्वज्ञसिद्धि
Jain Vidya, 1993
आत्मतत्त्व : एक समन्वयात्मक विमर्श
सन्तोष आचार्य · Jain Bharati, 2001
महाकवि पुष्पदंत का दार्शनिक ऊहापोह
डा० भागचद जन “भास्कर · Jain Vidya, 1985
यास्क एवम् पाणिनि – काल तथा विषयवस्तु का अन्तराल
Vasantkumar M. Bhatt · Sambodhi, 2010
परिकल्पना नए मानव की
आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000
पशु क्रूरता कानून कितना न्याय संगत?
Chanchalmal Chordiya · Jnana Desana, 2010
इस अंक के सहयोगी रचनाकार
डॉ० उदयचंद जैन · Jain Vidya, 1990
શૂન્યવાદ
Dalsukh D. Malvania · Sambodhi, 1976
“सत्ये समुपाभित्य बुद्धातां धर्सवेशता । छाफसंयृति सत्य ञ्र सत्य च परमार्थतः ॥ थे. २४,८”
भारतीय परपरा में सन्यास
साध्वी पीयूषप्रभा · Jain Bharati, 2001
यह जो देखते हैं
Jain Bharati, 2001
जर्द होती जीवन-पोथी
Jain Bharati, 2000
बड़ा होता कद
Jain Bharati, 2000
निर्धूम दीप की अप्रकप लौ
Jain Bharati, 2001
युवा पीढ़ी : दशा-दिशा
साध्वी विमलप्रज्ञा · Jain Bharati, 2001
“भगवान महावीर, बुद्ध, गांधी, भिक्षु और तुलसी के विचार तो उनके लिए मात्र इतिहास की वस्तु बनकर रह गए हैं ।”