Articles discussing गांधी
गांधी और जनतंत्र
जैनेन्द्र कुमार · Jain Bharati, 2001
“गांधीजी की बात दूसरी थी। वह रोग के भाग नहीं अपने में 'औषध' रूप थे!”
अहिंसा की सामाजिक ताकत
नंद चतुर्वेदी · Jain Bharati, 2000
“समता, हिसा-अहिसा, लोकतंत्र, स्वाधीनता, सामाजिक न्याय ओर समाज-स्चना के बुनियादी अधिकारों के मुद्दे बुद्ध, महावीर और गांधी से आगे उस तकनीकी समाज के भी होगे जो समता की सदी से कतराने के प्रयत्न में हैं।”
अहिंसा पर्व
Jain Bharati, 2001
“भारत की इस भूमि पर जो लोकतंत्र खड़ा है और गुलामी की बेड़ियों से जिस गांधी ने इस देश को मुक्त कराया था, उस गांधी के पास “अहिंसा” ही मुक्ति का एकमात्र शस्त्र और शास्त्र”
अहिंसा : चेतना का पुनराविष्कार
(डॉ.) निर्वाणप्रज्ञा · Jain Bharati, 2001
अहिंसक समाज के सूत्र
Jain Bharati, 2001
भारतीयता : इक्कीसवीं सदी की देहरी पर
रमेशचन्द्र शाह · Jain Bharati, 2000
आहार : स्वाद नहीं साधना
Jain Bharati, 2001
“गांधी के शब्दों में “स्वाद के लिए खाना अज्ञानता है। जीने के लिए खाना आवश्यकता है और संयम की रक्षा के लिए खाना साधना है।””
प्रसंग - वयं रक्षामः
Jain Bharati, 2000
बड़ा होता कद
Jain Bharati, 2000
अनुशासन के मंन्रदाता जयाचार्यं
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000
आरोग्य की चाबी अपने हाथ
Jain Bharati, 2000
मानसिक गुलामी का शब्दकोश
निर्मल वर्मा · Jain Bharati, 2000
परिकल्पना नए मानव की
आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000