Articles discussing भारत
आध्यात्मिक अर्थशास्त्र की प्रस्तावना
नन्दकिशोर आचार्य · Jain Bharati, 2001
“जैन भारती के जनवरी, 2001 अंक में 'आध्यात्मिक अर्थशास्त्र की प्रस्तावना” आलेख में श्री नन्दकिशोर आचार्य अर्थशास्त्रियों की उपरोक्त अवधारणा से पनप रहे उपभोक्ता समाज के खतरों की ओर इंगित करते हुए स्पष्ट करते हैं किआज की दुनिया का असली आर्थिक દ્ધ स्वदेशी व सार्वभौमिक प्रौद्योगिकी तथा विकेंद्रीकरण व केंद्रीकरण के बीच है।”
एक्का मणुस्सजाई
Jain Bharati, 2001
हिंसा की जड़े
सच्चिदानन्द सिन्हा · Jain Bharati, 2001
पशु क्रूरता कानून कितना न्याय संगत?
Chanchalmal Chordiya · Jnana Desana, 2010
“सरकार मांसाहार प्रचार एवं भारतीय संस्कृति की मूल अहिंसा की भावना को नष्ट करने वाली कम्पनियों को ताजा मांसाहार उपलब्ध कराने हेतु आमंत्रित कर रही દે, ताकि गांव-गांव ओर घर-घर में चाय, વીડી, सिगरेट की भांति ताजा मांस उपलब्ध कराया जा सके |”
गांधी और जनतंत्र
जैनेन्द्र कुमार · Jain Bharati, 2001
विज्ञान के क्षेत्र में अहिंसा की प्रासंगिकता
संघ का अनुशासन
आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000
धम्मो दीवों पड़ट्ठाण
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001
अहिसक समाज रचना की चुनौतियां
Jain Bharati, 2001
तन-मन की शुद्धि के लिए उपवास
मुनि रमेशकुमार · Jain Bharati, 2000
प्रतिहिंसा से शांति
Jain Bharati, 2001
अहिंसक समाज के सूत्र
Jain Bharati, 2001
जैन धर्म का केंद्र-बिंदु समता
प्रकाशकीय
कपूरचन्द पाटनी · Jain Vidya, 1985
नंगे पैर
वेंकटेश माडगूलकर · Jain Bharati, 2000