Articles discussing जैन धर्म
जैन धर्म का केंद्र-बिंदु समता
डॉ. इन्द्रचन्द्र शास्त्री · Jain Bharati, 2000
“जैन धर्म, दर्शन एवं પરપરા को विहंगम दृष्टि से देखा जाए तो उनका केंद्र-बिंदु समता के अतिरिक्त कुछ नहीं प्रतीत होता”
विज्ञान के क्षेत्र में अहिंसा की प्रासंगिकता
Late Shri Sureshchandra Barolia · Jnana Desana, 2011
“आधुनिक संदर्भ में जैन धर्म-तथा-उसकी अहिंसा की प्रासंगिकता का प्रश्न विशुद्ध रूप से एक समाजशास्त्रीय प्रश्न है तथा वर्तमान परिस्थितियों में अनेकों ज्वलंत समस्याओं की ओर हमारा ध्यान केन्द्रित करता हे।”
संप्रदायातीत चेतना
Jain Bharati, 2001
अहिसंक धर्म एवं विज्ञान के आलोक में अपना आहार
Ajit Jain 'Jalaj' · Jnana Desana, 2010
“जैन धर्म में वनस्पतियों को स्थावर की श्रेणी में रखा है जबकि अन्य सभी जंतु त्रस जीवों के अंतर्गत आते हैं।”
आधुनिक भू-विज्ञान के परिप्रेक्ष्य में जम्बूदीप और मेरुपर्वत
Rajkumar Nandgaonkar · Jnana Desana, 2011
आत्मविजय का नीतिशास्त्र
डॉ. बलवंत जानी · Jain Bharati, 2001
Jain evam Gandhi Achar Darshan ka Tulnatmak Adhyayan
Tribhuvan Nath Tripathi · Sambodhi, 2005
“जैन धर्म दर्शन में अहिंसा वह धुरि है जिस पर सभी जेनाचार सिद्धान्त प्रतिस्थापित हैं |”
अप्प संवोह कव्व
डॉ. राजाराम जैन, मंडलाचार्य श्री सिंह नंदि, डॉ. कस्तूरचन्द्र 'सुमन' · Jain Vidya, 1993
नमोस्तु तस्मे तपसेડद्भुताय
आचार्यश्री महाश्रमण · Jain Bharati, 2000
Karmabandh aur Uske Karan
Shekhar Chandra Jain · Sambodhi, 2003
प्रकृति के रिश्तों को पहचानें
Jain Bharati, 2001
तन-मन की शुद्धि के लिए उपवास
मुनि रमेशकुमार · Jain Bharati, 2000
भगवान महावीर की धर्म-क्रांति
प्रो. महावीर सरन जैन · Jain Bharati, 2001
प्रारम्भिक
प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1987