Articles discussing आचार्यश्री महाप्रज्ञ
उत्तर-आधुनिकता एवं आचार्यश्री महाप्रज्ञ
Jain Bharati, 2001
“आचार्यश्री महाप्रज्ञ का गत तीन दशक का चिंतन इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।”
निर्धूम दीप की अप्रकप लौ
Jain Bharati, 2001
मैं मुनि होना चाहता हूं
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000
“माघ महीने का शुक्ल पक्ष ओर आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी की जीवन-सरणी का योग आल्मकथ्य अनुपम धवल कीर्तिं से गुंफित है”
महावीर को सीमा में बांधने का प्रयास न हो -आचार्यश्री महाप्रज्ञ
Jain Bharati, 2001
“आचार्यश्री महाप्रज्ञजी का मानना था कि महावीर के क्रोध-विजय, शांति-विजय ओर उपशम को भली प्रकार समझ लिया जाए तो पूरी दुनिया का आज जो रूप दिखाई देता है वह बदल सकता है।”
कर्मशास्त्र और मनोविज्ञान
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000
“प्रस्तुत आलेख में आचार्यश्री महाप्रज्ञ ने इन दौनों ज्ञान विधाओं का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए अपना मत रखा है कि दोनों का साथ-साथ अध्ययन किया जाए तो इनकी अपूर्णता को भी समझा जा सकता है और अनेक अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर मिल सकते हैं, कई गुल्थियां सुलझ सकती हैं।”
इतिहास के पननों मे
Jain Bharati, 2000
समता को कैसे साधे
साध्वी विश्रुतविभा · Jain Bharati, 2000
अनुशासन के मंन्रदाता जयाचार्यं
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000
विशवधर्म का ताबीज : सच्चंमि धिइं कुव्वहा
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000
अहिंसा सार्वभौम का सपना
डा. बच्छराज दूगड़ · Jain Bharati, 2000
समाधि : चैतन्य का अनुभव
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001
आहार : स्वाद नहीं साधना
Jain Bharati, 2001
मनुष्य जाति एक है
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001
कायोत्सर्ग - साधना ओर फल
साध्वी राजीमती · Jain Bharati, 2001
हिसा विरति-अविरति-आचाराग के परिप्रेक्ष्य से
साध्वी शुभ्रयशा · Jain Bharati, 2001
आत्म-नियंत्रण से कषाय-मुक्ति
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001
अहिंसा-हिंसा : विविध पहलू
Jain Bharati, 2001
मैत्री : दृष्टि का रूपांतरण
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000
उज्वल किरणों का स्पर्श
Jain Bharati, 2001
धम्मो दीवों पड़ट्ठाण
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001
उपहार (?) बीसवीं सदी का
साध्वी विमलप्रज्ञा · Jain Bharati, 2000
“आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी के शब्दों में—“'विकास के लिए मनुष्य है अथवा मनुष्य के लिए विकास है।”
जीवन शैली : रहें भीतर जीएं बाहर
Jain Bharati, 2000
प्रसंग - वयं रक्षामः
Jain Bharati, 2000
व्यक्तित्व विकास की चाबी
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000
जेन-योग
आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000
नमोस्तु तस्मे तपसेડद्भुताय
आचार्यश्री महाश्रमण · Jain Bharati, 2000