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आचार्यश्री महाप्रज्ञ

26 articles in the archive discuss आचार्यश्री महाप्रज्ञ, from Jain Bharati (2000–2001). Open any article for its summary, citation and original PDF.

26 articles

Articles discussing आचार्यश्री महाप्रज्ञ

  1. उत्तर-आधुनिकता एवं आचार्यश्री महाप्रज्ञ

    Jain Bharati, 2001

    “आचार्यश्री महाप्रज्ञ का गत तीन दशक का चिंतन इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।”
  2. निर्धूम दीप की अप्रकप लौ

    Jain Bharati, 2001

  3. मैं मुनि होना चाहता हूं

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000

    “माघ महीने का शुक्ल पक्ष ओर आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी की जीवन-सरणी का योग आल्मकथ्य अनुपम धवल कीर्तिं से गुंफित है”
  4. महावीर को सीमा में बांधने का प्रयास न हो -आचार्यश्री महाप्रज्ञ

    Jain Bharati, 2001

    “आचार्यश्री महाप्रज्ञजी का मानना था कि महावीर के क्रोध-विजय, शांति-विजय ओर उपशम को भली प्रकार समझ लिया जाए तो पूरी दुनिया का आज जो रूप दिखाई देता है वह बदल सकता है।”
  5. कर्मशास्त्र और मनोविज्ञान

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000

    “प्रस्तुत आलेख में आचार्यश्री महाप्रज्ञ ने इन दौनों ज्ञान विधाओं का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए अपना मत रखा है कि दोनों का साथ-साथ अध्ययन किया जाए तो इनकी अपूर्णता को भी समझा जा सकता है और अनेक अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर मिल सकते हैं, कई गुल्थियां सुलझ सकती हैं।”
  6. इतिहास के पननों मे

    Jain Bharati, 2000

  7. समता को कैसे साधे

    साध्वी विश्रुतविभा · Jain Bharati, 2000

  8. अनुशासन के मंन्रदाता जयाचार्यं

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000

  9. विशवधर्म का ताबीज : सच्चंमि धिइं कुव्वहा

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000

  10. अहिंसा सार्वभौम का सपना

    डा. बच्छराज दूगड़ · Jain Bharati, 2000

  11. समाधि : चैतन्य का अनुभव

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001

  12. आहार : स्वाद नहीं साधना

    Jain Bharati, 2001

  13. मनुष्य जाति एक है

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001

  14. कायोत्सर्ग - साधना ओर फल

    साध्वी राजीमती · Jain Bharati, 2001

  15. हिसा विरति-अविरति-आचाराग के परिप्रेक्ष्य से

    साध्वी शुभ्रयशा · Jain Bharati, 2001

  16. आत्म-नियंत्रण से कषाय-मुक्ति

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001

  17. अहिंसा-हिंसा : विविध पहलू

    Jain Bharati, 2001

  18. मैत्री : दृष्टि का रूपांतरण

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000

  19. उज्वल किरणों का स्पर्श

    Jain Bharati, 2001

  20. धम्मो दीवों पड़ट्ठाण

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001

  21. उपहार (?) बीसवीं सदी का

    साध्वी विमलप्रज्ञा · Jain Bharati, 2000

    “आचार्यश्री महाप्रज्ञ जी के शब्दों में—“'विकास के लिए मनुष्य है अथवा मनुष्य के लिए विकास है।”
  22. जीवन शैली : रहें भीतर जीएं बाहर

    Jain Bharati, 2000

  23. प्रसंग - वयं रक्षामः

    Jain Bharati, 2000

  24. व्यक्तित्व विकास की चाबी

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000

  25. जेन-योग

    आचार्यश्री तुलसी · Jain Bharati, 2000

  26. नमोस्तु तस्मे तपसेડद्भुताय

    आचार्यश्री महाश्रमण · Jain Bharati, 2000