Articles discussing कपिल
सुदंसणचरिउ प्रयोजन की दृष्टि से
Jain Vidya, 1987
Jain Darshans ka Anya Darshanon se Dvirdh Avdaan (Hindi)
Sagarmal Jain · Sambodhi, 2011
सुदंसणचरिउ का छान्दस वैशिष्ट्य
मुनि नयनन्दी · Jain Vidya, 1987
असितगति-श्रावकाचार में स्वज्ञसिद्धि
Jain Vidya, 1993
महाकवि पुष्पदंत का दार्शनिक ऊहापोह
डा० भागचद जन “भास्कर · Jain Vidya, 1985
“महाकवि ने कपिल के सांख्य-दर्शन का खण्डन किया है । सांख्य-दर्शन के भ्रनुसार पुरुष चेतन्यरूप होते हुए भी निष्क्रिय, निर्मल श्रौर विशुद्ध है”