Articles discussing सुदर्शन
सुदंसणचरिउ प्रयोजन की दृष्टि से
Jain Vidya, 1987
“सुदंसभचरिउ स्पष्टतः एक चरितकाव्य है जिसमें मुनि नयनन्दी ने श्रपने चरित-नायक सुदर्शन के व्यक्तित्व को श्रपने श्राम्युदयिक प्रयोजनके भरौचित्य में ही स्वीकार किया है।”
भारतीय भाषाओं में सुदर्शनचरित-विषयक साहित्य
Jain Vidya, 1987
“जैन वाङ्मय में सुदर्शन का पावन श्रास्यान एमोकार (पंचनमस्कार) मन्त्र के माहात्म्य को प्रदर्शित करने જે लिए गुम्फित क्रिया गया है”
सुदंसणचरिउ का छान्दस वैशिष्ट्य
मुनि नयनन्दी · Jain Vidya, 1987
सुदंसणचरिउ का साहित्यिक मूल्यांकन
नयनंदि · Jain Vidya, 1987
“मुनिश्नी नयनंदि का कहना है कि रामायण में राम श्रौर सीता का वियोग है, महाभारत में यादव, पाण्डव श्रौर घृतराष्ट्र के वंशों का मंयकर क्षय हुमा है परन्तु सुदर्शन के चरित में कलंक की एक रेखा भी नहीं है”