Articles discussing मुनि नयनन्दी
सुदंसणचरिउ प्रयोजन की दृष्टि से
Jain Vidya, 1987
“सुदंसभचरिउ स्पष्टतः एक चरितकाव्य है जिसमें मुनि नयनन्दी ने श्रपने चरित-नायक सुदर्शन के व्यक्तित्व को श्रपने श्राम्युदयिक प्रयोजनके भरौचित्य में ही स्वीकार किया है।”
ध्रारम्भिक
प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन, मुनि नयनन्दी, डॉ. कमलचन्द्र सौगानी · Jain Vidya, 1987
“इन दोनों काव्यों के प्रध्ययन से पता चलता है कि मुनि नयनन्दी एकं परोपकारी श्र निष्काम सन्त थे।”
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1987
सुदंसणचरिउ का छान्दस वैशिष्ट्य
मुनि नयनन्दी · Jain Vidya, 1987
“झपभ्रंश के काव्यों में प्रायः અનરો જી बहुत ही चामत्कारिक योजना प्राप्त होती है, किन्तु मुनि नयनन्दी (11 वीं शती) द्वारा विरचित भ्रपश्नंशकाव्य “सुदंसणचरिउ' में तो અન્યો की विपुलता श्रौर विविधता के साथ ही विस्मयकारी विचित्रता भी इष्टिगत होती है”