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आचार्यश्री महाप्रज्ञजी

16 articles in the archive discuss आचार्यश्री महाप्रज्ञजी, from Jain Bharati (2000–2001). Open any article for its summary, citation and original PDF.

16 articles

Articles discussing आचार्यश्री महाप्रज्ञजी

  1. अहंकार और ममकार के विसर्जन का महोत्सव

    Jain Bharati, 2001

  2. संतुलन का सेतु है अनेकांत

    Jain Bharati, 2001

  3. बाहर का नहीं, अंदर का सौंदर्य बढ़े

    Jain Bharati, 2001

    “आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने समाज में नैतिकता और संयम की महती आवश्यकता को रेखांकित करते हुए इस समाधि स्थल को नैतिकता व संयम का शक्तिपीठ माना | उन्होंने कहा कि शक्ति के बहुत से पीठ गिनाए जा सकते हैं, लेकिन यह समाधिस्थल नैतिकता और संयम का शक्तिपीठ”
  4. एक्का मणुस्सजाई

    Jain Bharati, 2001

    “आचार्यश्री महाप्रज्ञजी कहते है कि लोकतंत्र के सारथियौ की योग्यता के कुछ मानक निर्धारित होने”
  5. दो कालजयी नक्षत्र

    साध्वी मुदितयशा · Jain Bharati, 2001

  6. एक उद्दाम अनुसंधित्सु

    डॉ. बच्छराज · Jain Bharati, 2001

  7. महासभा का 87वां वार्षिक अधिवेशन संपन्न

    Jain Bharati, 2001

  8. संवत्सरी : अहेतुक उलझन

    आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001

  9. अध्यात्म और सामाजिकता : आचार्य भिक्षु की दृष्टि में

    डॉ. दयानंद भार्गव · Jain Bharati, 2000

  10. अहिंसा को जानो तो

    Jain Bharati, 2001

  11. यह जो देखते हैं

    Jain Bharati, 2001

  12. पर्युषण : प्रेम और सहअस्तित्व का प्रशिक्षण

    साध्वी कनकश्री · Jain Bharati, 2000

  13. श्रमण कौन

    समणी सत्यप्रज्ञा · Jain Bharati, 2001

  14. छिद्दू की मैं -मैं

    Jain Bharati, 2001

  15. कितने युवजन

    Jain Bharati, 2001

  16. क्रियावाद बनाम कर्मवाद

    Jain Bharati, 2001