Articles discussing युवाचार्यश्री महाश्रमण
एक उद्दाम अनुसंधित्सु
डॉ. बच्छराज · Jain Bharati, 2001
“युवाचार्यश्री महाश्रमण ऐसे ही जिज्ञासु દે | उनकी जिज्ञासुवृत्ति सहज सामने आती रही है | उनके સાન की गंभीरता का रहस्य भी यही है”
पर्युषण : प्रेम और सहअस्तित्व का प्रशिक्षण
साध्वी कनकश्री · Jain Bharati, 2000
तीर्थ और तीर्थकर
डॉ. भोगीलाल जे. साडेसरा · Jain Bharati, 2001