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मुसव्विरी के मुकाम और राजस्थान

By Jyoti Kumawat

Vol. 41Dec-18pp. 145–154Hindi

Summary

ज्योति कुमावत इस लेख में राजस्थान में चित्रकला की परम्परा, विशेषकर मुसव्विरी या मुसब्बिरी कला पर चर्चा करते हैं। वे विष्णुधर्मोत्तर पुराण के हवाले से बताते हैं कि जैसे पर्वतों में सुमेरू, पक्षियों में गरुण और मनुष्यों में राजा श्रेष्ठ है, वैसे ही कलाओं में चित्रकला सर्वश्रेष्ठ है। लेख में प्रश्न उठाया गया है कि चित्रकला इतनी प्रशंसनीय क्यों है; उत्तर में कहा गया है कि आँखें मानव ज्ञान का मुख्य स्रोत हैं और दृश्य सौन्दर्य मन को सीधे प्रभावित करता है। लेखक अन्य ललित कलाओं—संगीत, काव्य, मूर्तिकला, स्थापत्य—की तुलना चित्रकला से करते हैं और निष्कर्ष निकालते हैं कि चित्रकला की प्रत्यक्षता और रंग‑आकार का सौन्दर्य इसे अन्य कलाओं से श्रेष्ठ बनाता है। राजस्थान की मुसव्विरी शैली में लोक‑स्मृतियाँ, धार्मिक कथाएँ और राजस्थानी जीवन के दृश्य उकेरे जाते हैं। कुमावत मुसव्विरी के ‘मुकाम’ अर्थात् इसके विकास केन्द्रों का वर्णन करते हैं और बताते हैं कि कैसे स्थानीय राजाओं और दरबारों के संरक्षण में यह कला फली‑फूली। लेख में रंगों, रेखाओं, नायिकाओं और प्रकृति के अंकन की विशिष्टताओं का वर्णन है। लेखक का तर्क है कि मुसव्विरी चित्रकला ने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आज भी लोक कलाकार इस परम्परा को जीवित रखे हुए हैं।

AI-generated summary, automatically checked against the article text.

Conclusion

राजस्थान की मुसव्विरी चित्रकला दृश्य सौन्दर्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अद्वितीय संगम है। इसके अध्ययन से पता चलता है कि कैसे लोक परम्परा और राजकीय संरक्षण के मेल से एक विशिष्ट कलाशैली विकसित हुई और अब भी जीवित है।

Key passages

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  • “मुसब्विरी के लिए इस्लाम में यह मान्यता है कि इसके पवित्र धर्म ग्रन्थ, कुरआन में जीवित वस्तुओं का चित्रण करना मना है।”
  • “मुगल शासक अकबर ने यहाँ तक कहा कि “बहुत से लोग चित्रों से घृणा करते है, किन्तु मैं ऐसे लोगों को नापसंद करता”
  • “सम्पूर्ण अध्ययन के परिणाम स्वरूप हमारे રિપિટ पर भारतीय मुसब्विरी के क्षेत्र में राजस्थान के मुसब्विरों के मुकाम बेहद महत्वपूर्ण दिखाई देते हैं जिनसे प्रेरित होकर निरन्तर सृजन कार्य गति प्राप्त कर रहा है”

Works cited in this article

  1. द्विवेदी, डॉ. प्रेम शंकर : भारतीय चित्रकला के विविध आयाम; कला प्रकाशन, वाराणसी, २००७, पृ. ५
  2. શ્રોત્રિય, डॉ. शुकदेव : कला विचार; छवि प्रकाशन, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, पृ. १७
  3. Kuiper, Kathleen : Islamic Art, Literature and Culture; Britanica Educational Publishing, New Delhi, 2010, Pg. 131
  4. बाघेला, डॉ. हेतर्सिह : भारतीय संस्कृति का विकास; रिसर्च पब्लिकेशन्स, जयपुर, नई दिल्ली, पृ. १६८
  5. પ્રતાપ, डॉ. रीता : भारतीय चित्रकला एवं मूर्तिकला का इतिहास; राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर, २०१, पृ. १०

Discussed in this article

People

  • ज्योति कुमावत
  • शाकिर अली
  • अकबर 3
  • एम.एफ. हुसैन
  • सैय्यद मेहर अली अब्बासी
  • जहांगीर
  • शाहजहां
  • मौलवी नवी
  • कुतुबमीनार
  • बाबर
  • हुमायूं
  • कुतुबुद्दीन एबक

Texts & works

  • विष्णुधर्मोत्तर पुराण

Dynasties, sects & groups

  • दिल्ली सल्तनत

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Vol. 41
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